महंगे फ्यूल के लिए रहें तैयार! मिडिल ईस्ट संकट से तेल कंपनियों की हालत खराब, ऐसे होगी आपकी जेब से भरपाई
मिडिल ईस्ट तनाव के कारण संकट में तेल कंपनियां
Petrol-Diesel Prices: पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर पूरी दुनिया पर देखने को मिल रहा है. इसके कारण कई देशों में गैस और तेल की किल्लत देखने को मिल रही है. यही वजह है कि वहां पेट्रोल-डीजल और गैस के दाम आसमान छू रहे हैं. इस तनाव का असर अब भारत की आम जनता की जेब पर भी जल्द ही सीधे तौर पर पड़ सकता है.
तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उछाल देखने को मिल रहा है. वहीं ऐसा माना जा रहा है कि अगर ईरान और अमेरिका में तनाव कम होता है तो कच्चे तेल की कीमतें कम हो सकती हैं, लेकिन फिलहाल ऐसा होता दिखाई नहीं दे रहा है. कच्चे तेल कीमतों में भारी उछाल के कारण सरकारी तेल कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक इंडियन ऑयल, बीपीसीएल और एचपीसीएल जैसी कंपनियां रोजाना करीब 1600 से 1700 करोड़ रुपये तक का नुकसान झेल रही हैं. यह भी तय है कि ज्यादा लंबे समय तक कंपनियां यह घाटा नहीं उठा सकती हैं. इसकी भरपाई आम जनता से ही की जा सकती है. यही वजह है कि ऐसा माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में तेल और गैस दोनों की ही कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है.
दूसरे देशों पर निर्भर है भारत
दरअसल भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है और मिडिल ईस्ट संकट के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल महंगा हो गया है. ब्रेंट क्रूड की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी हैं. इसके बावजूद केंद्र सरकार फिलहाल पेट्रोल और डीजल के दाम स्थिर रखे हुए है, जिससे तेल कंपनियों पर आर्थिक दबाव लगातार बढ़ रहा है.
कंपनियों को हुआ 1 लाख करोड़ का नुकसान
सूत्रों के अनुसार बीते करीब 10 हफ्तों में सरकारी तेल कंपनियों का कुल नुकसान 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा पहुंच चुका है. यही वजह है कि अब पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की चर्चा तेज हो गई है. कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि मई के मध्य तक ईंधन के दाम बढ़ सकते हैं, हालांकि सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है.
सरकार फिलहाल उपभोक्ताओं को राहत देने की कोशिश कर रही है, लेकिन अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल लगातार महंगा बना रहा तो आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाना मजबूरी बन सकता है.इसका सीधा असर महंगाई, ट्रांसपोर्ट और रोजमर्रा की चीजों की कीमतों पर देखने को मिल सकता है.
प्रधानमंंत्री नरेंद्र मोदी ने भी संकेत दिया है कि तेल की कीमतें अब बढ़ सकती हैं. यही वजह है कि उन्होंने लोगों से कम फ्यूल इस्तेमाल करने की बात कही और कहा कि अगर हो सके तो वर्क फ्रॉम होम करना चाहिए.
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