BRICS बैठक में भारत की बड़ी डिप्लोमेसी, PM मोदी ने की रूस और ईरान के नेताओं से मुलाकात

BRICS India 2026: एक तरफ जहां सबकी नजर ट्रंप के चीन दौरे पर हैं वहीं दिल्ली पर भी सबकी निगाहें टिकी हुई हैं. यहां ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान रूस और ईरान के नेताओं से पीएम मोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मुलाकात की है.
दिल्‍ली में हुई मुलाकातों पर सबकी नजर

दिल्‍ली में हुई मुलाकातों पर सबकी नजर

BRICS India 2026: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की बीजिंग बैठक ने दुनिया की निगाहें अपनी ओर खींच ली हैं, लेकिन इसी बीच नई दिल्ली में भी कूटनीति का बड़ा मंच सज गया है. भारत में चल रही ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस और ईरान के शीर्ष नेताओं से अलग-अलग मुलाकात कर कई अहम संदेश दिए हैं.  

दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स बैठक ऐसे समय हो रही है, जब पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर है, तेल की कीमतों में उछाल देखा जा रहा है और वैश्विक शक्तियां नए समीकरण बनाने में जुटी हैं. इसी माहौल में रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव को प्रधानमंत्री मोदी से अलग से मुलाकात का मौका मिला, जिसे भारत-रूस संबंधों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है.  

वहीं ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल से मुलाकात की है. चर्चा में ईरान युद्ध, समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दे प्रमुख रहे हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान ने ब्रिक्स देशों से अमेरिका और इजरायल की कार्रवाई की खुलकर आलोचना करने की मांग भी की.  

क्यों खास है दिल्ली की बैठक  

दिल्ली में ब्रिक्स की यह बैठक इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि उसी दौरान ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच चीन में हाई-प्रोफाइल वार्ता चल रही है. एक तरफ अमेरिका-चीन रिश्तों में तनाव कम करने की कोशिश हो रही है, तो दूसरी ओर भारत ब्रिक्स मंच के जरिए खुद को वैश्विक दक्षिण की मजबूत आवाज के रूप में पेश करने में जुटा है.  

बैठक के दौरान विदेश मंत्री एस जयशंकर ने साफ कहा कि दुनिया इस समय बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है और उभरती अर्थव्यवस्थाओं से स्थिरता की उम्मीद की जा रही है. ऊर्जा संकट, समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा और आर्थिक सहयोग इस बैठक के प्रमुख मुद्दों में शामिल रहे.

कौन-कौन हुआ बैठक में शामिल

ब्रिक्स समूह में अब सिर्फ भारत, रूस, चीन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका ही नहीं बल्कि ईरान, यूएई, मिस्र और इंडोनेशिया जैसे नए सदस्य भी शामिल हैं. ऐसे में इस मंच के भीतर मतभेद भी बढ़े हैं, खासकर ईरान युद्ध को लेकर भारत फिलहाल संतुलन की नीति अपनाते हुए सभी पक्षों से संवाद बनाए रखने की कोशिश कर रहा है.

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