पूर्व CJI चंद्रचूड़ को रूस ने सौंपी बड़ी जिम्मेदारी, यूक्रेन से जुड़े अरबों के विवाद में लड़ेंगे केस
पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़
Former CJI Chandrachud Russia Case: भारत के पूर्व सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ को रूस की तरफ से बड़ी जिम्मेदारी मिली है. रूस-यूक्रेन विवाद से जुड़े एक अहम अंतरराष्ट्रीय निवेश मामले में अपना मध्यस्थ नियुक्त किया है. यह मामला यूक्रेन के सरकारी बैंक ओशचाडबैंक और रूस के बीच चल रहा है. बैंक ने युद्ध के दौरान अपनी संपत्तियों और कारोबार को हुए नुकसान को लेकर रूस से मुआवजे की मांग की है.
यह विवाद 1998 में रूस और यूक्रेन के बीच हुए द्विपक्षीय निवेश समझौते के तहत चल रही आर्बिट्रेशन प्रक्रिया का हिस्सा है. ओशचाडबैंक का दावा है कि डोनेत्स्क, लुहांस्क, खेरसॉन और जापोरिज्जिया क्षेत्रों में उसकी संपत्तियों को नुकसान पहुंचा.बैंक ने इस मामले में सैकड़ों मिलियन डॉलर के दावे किए हैं.
तीन सदस्यीय ट्रिब्यूनल करेगा फैसला
मामले की सुनवाई तीन सदस्यों वाली अंतरराष्ट्रीय आर्बिट्रेशन टीम करेगी. कोस्टा रिका की पूर्व व्यापार मंत्री और आर्बिट्रेटर डायाला जिमेनेज को दोनों पक्षों ने मिलकर ट्रिब्यूनल का अध्यक्ष चुना है. वहीं, ओशचाडबैंक ने ग्रीस के आर्बिट्रेटर और नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर के प्रोफेसर स्टावरोस ब्रेकौलाकिस को अपने पक्ष से नियुक्त किया है. रूस की ओर से डीवाई चंद्रचूड़ इस पैनल का हिस्सा होंगे.
क्यों चंद्रचूड की नियुक्ति है खास?
चंद्रचूड़ की यह नियुक्ति इसलिए भी चर्चा में है. क्योंकि रूस ने इससे पहले भी उन्हें कुछ अन्य निवेश विवादों में आर्बिट्रेटर बनने का प्रस्ताव दिया था. रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने पहले विंटरशॉल डीआ और यूक्रेन की सरकारी कंपनी उक्रेनर्गो से जुड़े मामलों में रूस की ओर से आए प्रस्ताव स्वीकार नहीं किए थे.
क्या होता है आर्बिट्रेटर?
आर्बिट्रेटर की भूमिका किसी देश के वकील की तरह नहीं होती. वह विवाद की सुनवाई करने वाले पैनल का सदस्य होता है और मामले में स्वतंत्र कानूनी विचार रखने की जिम्मेदारी निभाता है. ऐसे में चंद्रचूड़ की नियुक्ति अंतरराष्ट्रीय कानून के क्षेत्र में उनके अनुभव को देखते हुए महत्वपूर्ण मानी जा रही है.
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