स्मृति ईरानी को राज्यसभा क्यों नहीं भेजा गया? 2024 की हार के बाद खुद दिया जवाब

smriti irani: स्मृति ईरानी ने अमेठी लोकसभा सीट पर हार के बाद राज्‍यसभा  न भेजे जाने के पार्टी के फैसले पर खुलकर बात की है. इस दौरान उन्‍होंने यह भी बताया कि इस तरह का फैसला क्यों लिया गया?
स्मृति ईरानी

स्मृति ईरानी

smriti Irani: भारतीय जनता पार्टी की नेता और पूर्व मंत्री  स्मृति ईरानी को बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में जगह मिली है. इसके बाद वे एक बार फिर चर्चा में आ गई हैं. साल 2024 के लोकसभा चुनाव में उनकी हार के बाद से ही यह सवाल उठ रहा था कि पार्टी उन्‍हें राज्‍यसभा भेज सकती है. हालांकि ऐसा नहीं हुआ. पार्टी के फैसले और राज्‍यसभा न भेजे जाने को लेकर पहली बार स्मृति ईरानी ने खुलकर बात की है.

उन्होंने कहा कि बीजेपी में किसी पद को व्यक्ति की पहचान नहीं माना जाता है. बल्कि उसे संगठन के लिए काम करने का एक अवसर समझा जाता है. स्मृति ईरानी ने यह बात एक इंटरव्यू के दौरान कही है.

राहुल गांधी ने अमेठी में दर्ज की थी जीत

स्मृति ईरानी के मुताबिक, अगर उनके लिए राजनीतिक पद ही सबसे महत्वपूर्ण होता तो वह अमेठी से चुनाव लड़ने का फैसला नहीं करतीं. उन्होंने याद दिलाया कि अमेठी लंबे समय तक बीजेपी के लिए आसान सीट नहीं रही थी. इसके बावजूद उन्होंने वहां चुनाव लड़ने का फैसला किया और 2019 में कांग्रेस नेता राहुल गांधी को हराकर बड़ी राजनीतिक जीत दर्ज की. हालांकि 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्हें अमेठी में हार का सामना करना पड़ा.

स्मृति ईरानी ने अपने राजनीतिक सफर के शुरुआती दिनों का भी जिक्र किया. उन्होंने बताया कि साल 2003 में वह महाराष्ट्र बीजेपी के युवा मोर्चा से जुड़ी थीं. उसी दौर में देवेंद्र फडणवीस भी युवा संगठन में उनके साथ काम कर रहे थे. उन्होंने कहा कि उस समय दोनों ने शायद ही सोचा होगा कि आने वाले सालों में वे राजनीति में इतनी बड़ी जिम्मेदारियों तक पहुंचेंगे.

स्मृति ईरानी ने क्‍या-क्‍या कहा?

स्मृति ईरानी ने पुराने दिनों को याद करते हुए बताया कि बीजेपी संगठन में काम करते समय कार्यकर्ताओं के बीच सहयोग और टीम भावना पर काफी जोर दिया जाता था. कई बार वह अपने साथियों की मदद के लिए घर से पेट्रोल और पानी के खर्च तक के पैसे लेकर निकलती थीं. संगठन के वरिष्ठ नेता उन्हें जरूरतमंद कार्यकर्ताओं को साथ लेकर चलने और उनकी मदद करने की सीख देते थे.

स्मृति ईरानी ने कहा कि ऐसे माहौल में तैयार हुए कार्यकर्ता के लिए पद से ज्यादा संगठन और जिम्मेदारी महत्वपूर्ण होती है. उनके अनुसार, पार्टी में कोई जिम्मेदारी मिलना सम्मान जरूर है, लेकिन राजनीति में असली महत्व काम और संगठन के प्रति प्रतिबद्धता का है.

उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से सार्वजनिक रूप से की गई प्रशंसा उनके राजनीतिक सफर की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक है. अमेठी में हार के बाद राज्यसभा न मिलने के सवाल पर उनका जवाब यही रहा कि बीजेपी में संगठन के लिए काम करना किसी संवैधानिक पद से कम महत्वपूर्ण नहीं है.

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