सोनम वांगचुक के अनशन खत्म होते ही गरमाई सियासत, इमरान मसूद बोले- ‘यह अन्ना हजारे पार्ट-2 है’
सोनम वांगचुक और इमरान मसूद
Imran Masood Ne Sadha Nishana: नीट पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में बदलाव की मांग को लेकर लंबे समय से भूख हड़ताल कर रहे सोनम वांगचुक ने 26 दिन बाद अपना अनशन समाप्त कर दिया. उनके इस फैसले के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है. कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने वांगचुक पर सवाल उठाते हुए उनके आंदोलन की तुलना अन्ना हजारे के आंदोलन से की.
मसूद ने दावा किया कि वांगचुक ने छात्रों के मुद्दों को अंत तक नहीं पहुंचाया और केंद्र सरकार के साथ बातचीत के बाद आंदोलन खत्म कर दिया. उनका कहना था कि जिस बैठक में केंद्रीय मंत्रियों से चर्चा हुई, उसमें छात्रों की मौजूदगी नहीं थी. उनके मुताबिक वहां केवल लद्दाख के प्रतिनिधि थे और छात्रों के हितों की आवाज सीधे तौर पर सामने नहीं आई.
कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि पूरा घटनाक्रम पहले से तय रणनीति का हिस्सा लगता है. उन्होंने कहा कि जैसे 2011 के अन्ना हजारे आंदोलन के बाद उसकी धार धीरे-धीरे खत्म हो गई थी, वैसे ही उन्हें आशंका है कि वांगचुक का आंदोलन भी अब शांत पड़ जाएगा.
सरकार ने क्या दिया भरोसा?
नीट पेपर लीक मामले में केंद्र सरकार द्वारा फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने की घोषणा पर भी मसूद ने सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि केवल अदालत बनाने की घोषणा पर्याप्त नहीं है. उनका मानना है कि शिक्षा के लिए भारी कर्ज लेने वाले परिवारों को राहत देने के लिए शिक्षा ऋण माफी जैसे ठोस कदम उठाए जाने चाहिए.
इमरान मसूद ने छात्र नेता अभिजीत दीपके की सराहना करते हुए कहा कि उन्हें छात्रों की आवाज बुलंद करने का अवसर मिला है.इस जिम्मेदारी को गंभीरता से निभाना चाहिए. उन्होंने कहा कि छात्र आंदोलन को मजबूत नेतृत्व की जरूरत है.
मसूद ने सरकार पर साधा निशाना
दिल्ली विश्वविद्यालय के मुद्दे पर भी मसूद ने केंद्र सरकार की आलोचना की, उनका कहना था कि सरकार को शिक्षा को अधिक सुलभ और किफायती बनाने पर ध्यान देना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि केवल अधिकारियों का तबादला या बदलाव करने से व्यवस्था में बड़ा सुधार नहीं आएगा.
अंत में उन्होंने कहा कि आंदोलन किसी भी दबाव में रुकने वाला नहीं है. चाहे प्रशासन कोई भी कदम उठाए, कांग्रेस छात्रों के साथ खड़ी रहेगी और उनकी मांगों का समर्थन जारी रखेगी.