‘लोगों को वोटिंग करने से रोकना मनमाना…’, SIR आंदोलन के बीच जस्टिस उज्ज्ल भुइयां का बयान
जस्टिस उज्ज्ल भुइयां
Justice Ujjal Bhuyan Statement: देश भर में स्पेशल इंटेसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन हो रहा है. इस बीच सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्ज्ल भुइयां का एक बयान चर्चा में है. उन्होंने कहा कि भारतीय नागरिक की सिटीजनशिप और वोट देने का अधिकार एक-दूसरे जुड़ा हुआ है. वोटिंग से वंचित करना अपने ही देश में नागरिकों को दूसरे दर्जे का बनाता है.
‘ऐसी प्रक्रिया मनमानी है’
NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के मूट कोर्ट प्रतियोगिता के समापन समारोह में जस्टिस उज्ज्ल भुइयां शामिल हुए. इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय नागरिक होना या वोटर लिस्ट में शामिल होने का अधिकार अलग नहीं है. इसे अलग किया जाता है तो ये शरीर से आत्मा निकालने जैसा ही होगा.
उन्होंने आगे कहा कि संविधान नागरिकों के दो वर्ग नहीं तैयार करता है. एक वर्ग वो जिनके पास वोट देने का अधिकार है, वहीं दूसरे के पास नहीं है. किसी भारतीय को वोट देने के अधिकार से वंचित किया जाता है तो ये संविधान के अनुच्छेद 326 और 14 का उल्लंघन होगा. जस्टिस भुइयां ने कहा कि ऐसी प्रक्रिया जो देश के लाखों नागरिकों को वोट देने के अधिकार से वंचित कर दूसरे दर्जे का नागरिक बनाता है. ये प्रोसेस मनमानी है.
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दिल्ली-मुंबई में प्रदर्शन जारी
SIR और CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में मार्च निकाला गया. इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प देखने को मिली. मुंबई में उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने मार्च निकाला, जिसमे कांग्रेस और NCP (शरतचंद्र गुट) के नेता शामिल हुए. वहीं, इंडिया गबंधन ने दिल्ली में 7 अक्तूबर को प्रदर्शन करने की बात कही है. CJI सूर्यकांत की बेंच सोमवार को ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने और उनके कथित फैसले रद्द करने की मांग वाली याचिकाएं सुनेगी. आरोप है कि दोनों चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना सॉफ्टवेयर और फॉर्म-6 बदले गए थे.