मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाना इतना आसान नहीं, जानिए क्या है पूरा संवैधानिक खेल

CEC gyanesh kumar: भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के विरोध में इस समय पूरा विपक्ष उतर आया है. उनके इस्तीफे की मांग की जा रही है. तो वहीं सरकार पर उन्‍हें हटाने का दबाव बनाया जा रहा है. ऐसे में जानते हैं कि ज्ञानेश कुमार को किस तरीके से पद से हटाया जा सकता है.
CEC gyanesh kumar

CEC gyanesh kumar: देशभर में इस समय भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार चर्चा में हैं. उन पर आरोप है कि वह अपनी मर्जी से ही चुनाव आयोग को चला रहे हैं. आरोप यह भी है कि वह अपने साथ काम करने वाले लोगों की बात भी नहीं सुनते हैं. यही वजह है कि विपक्ष उन्‍हें हटाने की मांग कर रहा है. पूरे बवाल के बीच अब जानते हैं कि ज्ञानेश कुमार को हटाना कितना आसान है?

भारत में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) को हटाने की प्रक्रिया आम सरकारी पदों से अलग और संवैधानिक है. संविधान के अनुच्छेद 324(5) में CEC को सुप्रीम कोर्ट के जज जैसी सुरक्षा दी गई है.

क्यों अलग है प्रक्रिया?

भारत में मुख्य चुनाव आयुक्त यानी CEC का पद संवैधानिक पद है. चुनाव आयोग को देश में लोकसभा, विधानसभा, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनाव कराने की जिम्मेदारी दी गई है. इसी वजह से CEC को पद से हटाने की प्रक्रिया भी सामान्य सरकारी अधिकारियों से अलग रखी गई है.

संविधान के अनुच्छेद 324(5) के मुताबिक, मुख्य चुनाव आयुक्त को उसी तरीके और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है, जिस तरह सुप्रीम कोर्ट के किसी जज को हटाया जाता है. यानी सिर्फ सरकार के आदेश से CEC को पद से नहीं हटाया जा सकता है.

कहां से होती है पद से हटाने की प्रक्रिया

चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की प्रक्रिया संसद से शुरू होती है. अगर CEC के खिलाफ गंभीर आरोप हों, तो उनके हटाने के लिए संसद के किसी सदन में प्रस्ताव लाया जा सकता है. प्रस्ताव पर सदन में तय संवैधानिक प्रक्रिया के तहत विचार और मतदान होता है. इसके बाद दोनों सदनों में आवश्यक विशेष बहुमत से प्रस्ताव पारित होना जरूरी है.

दोनों सदनों से प्रस्ताव पारित होने के बाद इसे राष्ट्रपति के पास भेजा जाता है. राष्ट्रपति के आदेश के बाद ही CEC को पद से हटाया जा सकता है. इस तरह पूरी प्रक्रिया में संसद और राष्ट्रपति दोनों की भूमिका होती है.

आसान नहीं है ज्ञानेश कुमार को हटाना

CEC और दूसरे चुनाव आयुक्तों की स्थिति में भी अंतर है. चुनाव आयोग के आधिकारिक दस्तावेज के मुताबिक, CEC को सुप्रीम कोर्ट के जज के समान हटाने की सुरक्षा प्राप्त है, जबकि अन्य चुनाव आयुक्तों को हटाने के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त की सिफारिश जरूरी होती है.

यानी आसान भाषा में समझें तो CEC को हटाने का अधिकार सीधे केंद्र सरकार के पास नहीं है. इसके लिए सुप्रीम कोर्ट के जज को हटाने जैसी संसदीय प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है.

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