लेट सैलरी पर लगाम, ओवरटाइम का मिलेगा डबल पैसा… कर्मचारियों को लेकर योगी सरकार का बड़ा फैसला

UP Labour Rules: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने नोएडा में चल रहे विरोध प्रदर्शन के बाद बड़ा फैसला लिया है. इसके तहत अब कर्मचारियों को हफ्ते एक छुट्टी दी जाएगी. इसके साथ ही अगर छुट्टी के दिन काम लिया जाता है तो कंपनी डबल पैसा देना होगा.
CM Yogi Adityanath

सीएम योगी आदित्यनाथ

UP Labour Rules: उत्तर प्रदेश के नोएडा में पिछले कई दिनों से कर्मचारियों का विरोध प्रदर्शन हो रहा है. इसको देखते हुए अब सीएम योगी आदित्यनाथ ने कर्मचारियों के हित में बड़ा कदम उठाते हुए नई व्यवस्था लागू की है. इनका मकसद श्रमिकों को समय पर वेतन और बेहतर कामकाजी अधिकार देना है.

गौतम बुद्ध नगर जिले में लागू इन नए नियमों के अनुसार अब निजी कंपनियों को ओवरटाइम के बदले कर्मचारियों को दोगुना भुगतान करना अनिवार्य होगा. इसके साथ ही वेतन हर महीने की 10 तारीख तक एकमुश्त देना होगा और बोनस सीधे कर्मचारियों के बैंक खाते में ट्रांसफर करना जरूरी किया गया है.

प्रशासन का मानना है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और कर्मचारियों को समय पर उनका हक मिलेगा. इसके साथ ही कंपनियों की मनमानी पर भी लगाम लगाई जा सकेगी.  

छुट्टी के दिन काम करने पर मिलेगा दोगुना वेतन

जिलाधिकारी मेहा रूपम ने औद्योगिक इकाइयों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर स्पष्ट किया कि ओवरटाइम भुगतान में किसी भी तरह की कटौती बर्दाश्त नहीं की जाएगी. इसके अलावा हर हफ्ते एक दिन की छुट्टी भी कर्मचारियों को देनी ही होगी. अगर किसी कर्मचारी से रविवार को काम कराया जाता है, तो उसे दोगुनी मजदूरी दी जाएगी.

वेतन व्यवस्था को लेकर भी सख्ती दिखाई गई है.  कंपनियों को कर्मचारियों को वेतन पर्ची देना होगा, ताकि भुगतान की पूरी जानकारी स्पष्ट रहे. वहीं बोनस का भुगतान 30 नवंबर तक सीधे बैंक खातों में करना तय किया गया है.

प्रशासन ने लागू किए सख्त नियम

महिला कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए भी नए प्रावधान लागू किए गए हैं. सभी कंपनियों को कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की शिकायतों के लिए आंतरिक समिति बनानी होगी, जिसकी अध्यक्षता महिला सदस्य करेंगी. इसके साथ ही शिकायत पेटियां और कंट्रोल रूम की व्यवस्था भी की गई है, जहां कर्मचारी अपनी समस्याएं दर्ज करा सकेंगे.

इन फैसलों के पीछे नोएडा के फेस-2 औद्योगिक क्षेत्र में चल रहा कर्मचारियों का प्रदर्शन अहम वजह माना जा रहा है.  तीन दिनों तक चले विरोध के दौरान कर्मचारियों ने वेतन में देरी, अनियमितताओं और प्रबंधन की मनमानी के खिलाफ आवाज उठाई थी. इसके बाद प्रशासन ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए यह नए नियम लागू किए.

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