“हमारी अंतरात्मा को लगी चोट”, ‘बुलडोजर एक्शन’पर सु्प्रीम कोर्ट ने PDA को लगाई फटकार, 10-10 लाख मुआवजा देने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट
Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक अहम फैसले में प्रयागराज विकास प्राधिकरण (PDA) को कड़ी फटकार लगाई है. कोर्ट ने कहा कि प्राधिकरण ने कानून की उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना कुछ लोगों के घरों को बुलडोजर से ढहा दिया, जो गलत और अमानवीय है. इस घटना से कोर्ट की अंतरात्मा को झटका लगा है.
यह मामला साल 2021 का है, जब प्रयागराज में पांच लोगों के घर तोड़े गए थे. अब कोर्ट ने पीड़ितों को मुआवजा देने का आदेश दिया है. आइए, इस पूरे मामले को विस्तार से समझते हैं.
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, साल 2021 में प्रयागराज विकास प्राधिकरण ने शहर में कुछ घरों को अवैध निर्माण बताकर तोड़ने का फैसला किया. इनमें एक वकील, एक प्रोफेसर और तीन अन्य लोगों के घर शामिल थे. प्राधिकरण ने दावा किया कि ये निर्माण नियमों के खिलाफ थे. इसके बाद बुलडोजर चलाकर इन घरों को ढहा दिया गया. लेकिन घर मालिकों का कहना था कि उन्हें न तो पहले कोई नोटिस दिया गया और न ही अपनी बात रखने का मौका. यह कार्रवाई एकतरफा और गैरकानूनी तरीके से की गई.
पीड़ितों ने इसके खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ी और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा. कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार और प्रयागराज विकास प्राधिकरण के रवैये की सख्त आलोचना की.
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
इस मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भारत एक ऐसा देश है जहां कानून का राज चलता है. नागरिकों के घरों को इस तरह बिना प्रक्रिया के नहीं तोड़ा जा सकता.
सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के आर्टिकल 21 का हवाला दिया, जिसमें हर नागरिक को सम्मानजनक जीवन और आश्रय का अधिकार दिया गया है. कोर्ट ने कहा कि यह अधिकार मूलभूत है और इसे कोई छीन नहीं सकता.
कोर्ट ने साफ किया कि अगर कोई निर्माण अवैध है, तो भी उसे हटाने से पहले मालिक को नोटिस देना, सुनवाई का मौका देना और कानूनी प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है.
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सुप्रीम कोर्ट का फैसला
अब सुप्रीम कोर्ट ने प्रयागराज विकास प्राधिकरण को पीड़ित पांचों घर मालिकों को 6 हफ्ते के अंदर 10-10 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है. यह राशि पीड़ितों को उनके नुकसान और परेशानी की भरपाई के लिए दी जाएगी. कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार और PDA को चेतावनी दी कि भविष्य में ऐसी कार्रवाई से बचा जाए.
क्यों अहम है यह फैसला?
हाल के सालों में देश के कई हिस्सों में बुलडोजर कार्रवाई को लेकर सवाल उठे हैं. कई बार इसे “बुलडोजर जस्टिस” कहा गया, जहां सजा देने के लिए कानूनी प्रक्रिया को नजरअंदाज कर सीधे तोड़फोड़ की जाती है. सुप्रीम कोर्ट का यह रुख दिखाता है कि ऐसी कार्रवाइयों को बिना ठोस आधार और प्रक्रिया के मंजूरी नहीं दी जाएगी.