‘हमें तो अपनों ने लूटा, गैरों में कहां दम था…’, 60 साल के बुजुर्ग ने कराया अपना मृत्यु भोज; 7 हजार लोगों को खिलाया
60 साल के बुजुर्ग ने अपने जीते जी मृत्यु भोज करवाया.
Input- कपिल मिश्रा
MP News: मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में एक ऐसा दिलचस्प मामला सामने आया है, जिसने सभी लोगों को हैरान कर दिया. हाजीनगर में रहने वाले 60 साल के कल्याण पाल ने जीते जी ही अपना मृत्यु भोज करवा लिया. इस मृत्यु भोज में लगभग 7 हजार लोगों ने खाना भी खाया. दरअसल अविवाहित और अकेले जीवन जी रहे कल्याण पाल के मन में वर्षों से एक ही चिंता थी, मेरे मरने के बाद मेरा अंतिम संस्कार कौन करेगा? कर्मकांड और भंडारा कौन कराएगा?
‘हमें तो अपनों ने लूटा, गैरों में कहां दम था…’
पूरा मामला करैरा क्षेत्र के हाजीनगर इलाके का है. बताया जा रहा है कि आयोजन से दो दिन पहले कल्याण पाल खुद प्रयागराज पहुंचे. वहां उन्होंने अपने नाम से विधि-विधान के साथ कर्मकांड कराया. इतना ही नहीं, अस्थि विसर्जन की परंपरा की तरह गंगा स्नान भी किया. इसके बाद वह वापस अपने गांव हाजीनगर लौट आए. गांव लौटने के बाद उन्होंने 15 मई से 24 घंटे के लिए सीताराम रामधुन पाठ शुरू कराया. पूरे गांव में धार्मिक माहौल बना रहा और लोग इस अनोखे आयोजन को लेकर चर्चा करते रहे.
7 हजार लोगों के भंडारे का आयोजन किया
शनिवार 16 मई को धार्मिक कार्यक्रमों के बाद दोपहर करीब 4 बजे से बड़े स्तर पर भंडारा शुरू हुआ. यह आयोजन पूरी तरह मृत्यु भोज की तरह किया गया था, लेकिन फर्क सिर्फ इतना था कि जिसका मृत्यु भोज हो रहा था, वह खुद लोगों का स्वागत करता नजर आ रहा था. गांव और आसपास के क्षेत्रों से हजारों लोग आयोजन में पहुंचे. ग्रामीणों के मुताबिक करीब 6 से 7 हजार लोगों ने भंडारे में भोजन किया. आयोजन में खाने-पीने और बैठने की विशेष व्यवस्था की गई थी.
वायरल हुआ था निमंत्रण कार्ड
कुछ दिन पहले इस आयोजन का निमंत्रण कार्ड सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ था. कार्ड में लिखा था, ‘मुझे तो अपनों ने लूटा, गैरों में कहां दम था, मेरी कश्ती वहां डूबी जहां पानी कम था. कार्ड वायरल होने के बाद से ही लोग यह जानने को उत्सुक थे कि आखिर ऐसा आयोजन क्यों किया जा रहा है.
जानकारी के मुताबिक कल्याण पाल अपने पिता के इकलौते बेटे हैं. उनकी शादी भी नहीं हुई. परिवार में ऐसा कोई नहीं है, जो उनके बाद अंतिम संस्कार और कर्मकांड की जिम्मेदारी निभा सके. कल्याण पाल बताते हैं कि उन्हें हमेशा इस बात की चिंता सताती थी कि उनकी मौत के बाद कहीं उनका अंतिम संस्कार और धार्मिक कर्मकांड अधूरे न रह जाएं. इसी वजह से उन्होंने सब कुछ अपनी आंखों के सामने ही करा लिया. कल्याण पाल ने कहा कि अब उन्हें किसी बात की चिंता नहीं है. उनका मानना है कि इंसान को जीवन में सबसे बड़ा सुकून तब मिलता है, जब वह अपनी जिम्मेदारियां पूरी कर ले. उन्होंने भावुक होकर कहा कि अब जब भी मौत आएगी, मैं सुकून से मर सकूंगा, क्योंकि अपने अंतिम संस्कार से जुड़े सभी कर्मकांड मैं जीते जी देख चुका हूं.
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