MP की 25 परसेंट आबादी ‘साइलेंट किलर’ का शिकार, हर चौथा व्यक्ति हाई BP का मरीज; मोबाइल की लत बड़ी वजह

मोबाइल पर ज्यादा समय बिताने के कारण लोगों में स्ट्रेस हॉर्मोन बढ़ रहा है. इसके अलावा खराब नींद और बेतरतीब लाइफ स्टाइल भी दूसरी वजह है.
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सांकेतिक तस्वीर.

MP News: मोबाइल की लत और घंटों लैपटॉप के सामने स्क्रीन पर बैठना किस हद तक जानलेवा साबित हो रहा है, इसका अंदाजा नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे(NFHS) की रिपोर्ट से लगाया जा सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक मध्य प्रदेश का हर चौथा व्यक्ति हाई ब्लड प्रेशर का शिकार है. हैरानी की बात ये है कि इनमें केवल बुजुर्ग और युवा ही नहीं बल्कि 6 परसेंट से ज्यादा स्कूली बच्चे हाई बीपी का शिकार हो रहे हैं.

MP की 25 परसेंट आबादी ‘साइलेंट किलर’ का शिकार

मध्य प्रदेश की लगभग 25 परेसेंट आबादी हाई ब्ल प्रेशर का शिकार है. ताज्जुब की बात ये कि बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है. जिन्हें पता ही नहीं है कि वे इस बीमारी का शिकार हैं. भोपाल एम्स में 5 से 18 साल के मोटे बच्चों के बीच हुई स्टडी में सामने आया है कि 43 परेसेंट से ज्यादा बच्चे हाई बीपी और लगभग 27 परसेंट बच्चों की किडनी और हार्ट पर असर है. हालांकि ये सैंपल केवल 60 बच्चों पर लिया गया है.

अगर पूरी रिपोर्ट की बात करें तो मध्य प्रदेश के सबसे ज्यादा 34 परसेंट 45 से 59 साल के लोग, जबकि 30 से 44 साल के लोगों में 18 प्रतिशत और 15 से 29 साल वर्ग के 8 परसेंट से ज्यादा लोग हाई बीपी की बीमारी का शिकार हैं. मध्य प्रदेश के लगभग 2 करोड़ लोगों की स्क्रीनिंग की गई थी, जिसमें लगभग 19 परसेंट लोग हाई ब्लड प्रेशर की बीमारी से पीड़ित हैं. 2 करोड़ लोगों में मरीजों की कुल संख्या 37 लाख से ज्यादा है.

रिपोर्ट में 3 बड़े कारण निकलकर सामने आए हैं

NFHS की रिपोर्ट में मध्य प्रदेश के लोगों में हाई ब्लड प्रेशर बढ़ने के तीन बड़े कारण निकलकर सामने आए हैं. इनमें मोबाइल, लैपटॉप के सामने टाइम बिताना सबसे बड़ा कारण है. इसके अलावा नींद पूरी ना होना और कामकाज के कारण अलर्ट मोड पर सोना भी हाई बीपी की वजह हैं.

डॉक्टर्स के मुताबिक आज के लोगों की फिजिकल एक्टिविटी काफी कम हो गई है. मोबाइल की लत इस कदर हावी है कि हम हर समय स्क्रीन पर कुछ ना कुछ देखना चाहते हैं. मोबाइल पर ज्यादा समय बिताने के कारण लोगों में स्ट्रेस हॉर्मोन बढ़ रहा है. इसके अलावा खराब नींद भी दूसरी वजह है. इसकी वजह से लोगों में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है. वहीं एक अन्य कारण जो सामने आया है, वो है लोगों का सोते समय भी अलर्ट मोड पर रहना.

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