MP News: केंद्र की नई गाइडलाइन, डीएमएफ फंड के दुरुपयोग पर कलेक्टर होंगे दोषी, 1500 करोड़ के फंड पर नहीं चलेगी मंत्रियों की मनमानी
भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक
MP News: मध्य प्रदेश में डिस्ट्रिक्ट मिनरल फंड (डीएमएफ) की राशि खर्च करने को लेकर अब मंत्री, सांसद और विधायकों की मनमानी नहीं चलेगी. केंद्र सरकार के नए दिशा-निर्देशों के तहत अब डीएमएफ फंड का ऑडिट सीए की जगह नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) द्वारा किया जाएगा. इसी के आधार पर राज्य सरकार नई गाइडलाइन तैयार कर रही है.
प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार जिस क्षेत्र और जिले में खदानें स्थित हैं, डीएमएफ की राशि वहीं खर्च करना अनिवार्य होगा. यदि तय समय पर खर्च का प्लान प्रस्तुत नहीं किया गया या समिति की बैठक नहीं हुई, तो यह राशि सरकारी खजाने में जमा कर दी जाएगी. यह व्यवस्था इसी वर्ष से लागू होने जा रही है.
हर साल 1500 करोड़ रुपये की डीएमएफ राशि होती है जमा
प्रदेश में हर वर्ष करीब 1500 करोड़ रुपए की डीएमएफ राशि सरकारी खजाने में जमा हो जाती है. इसमें सबसे ज्यादा, सवा सौ करोड़ रुपए से अधिक राशि सिंगरौली जिले से आती है. पिछले तीन वर्षों में 9400 करोड़ रुपए से अधिक डीएमएफ राशि कलेक्टरों द्वारा खर्च नहीं की जा सकी, जिसके कारण यह पैसा राज्य के खजाने में जमा है. जिला खनिज फंड से मिलने वाली रॉयल्टी का 10 से 30 प्रतिशत हिस्सा डीएमएफ में जमा किया जाता है.
यह राशि उन्हीं जिलों और खनन प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए खर्च किए जाने का प्रावधान है. हालांकि, अब तक करीब 30 प्रतिशत राशि प्रदेश के विभिन्न बड़े प्रोजेक्ट्स पर खर्च की जाती थी, जिनका निर्णय मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली समिति करती थी. नए नियमों के तहत इस व्यवस्था में भी बदलाव किया जा रहा है.
खर्च में कंजूसी से ग्रामीण विकास प्रभावित
सरकार द्वारा डीएमएफ राशि खर्च करने में बरती जा रही कंजूसी का सीधा असर स्थानीय और ग्रामीण विकास पर पड़ रहा है. जिन क्षेत्रों में खनन होता है, वहां के लोगों को इस योजना से मिलने वाले लाभ समय पर नहीं मिल पा रहे हैं. डीएमएफ राशि का उपयोग स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, रोजगार, पेयजल, स्वच्छता और अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए किया जाना है, लेकिन देरी और प्रक्रियात्मक अड़चनों के कारण कई योजनाएं अधर में लटकी रहती हैं.
केस-1: सिंगरौली जिला
भारत सरकार के खान मंत्रालय के अनुसार सिंगरौली जिले में करीब 5990 करोड़ रुपए डीएमएफ की राशि उपलब्ध है, जिसमें से अब तक लगभग 11 करोड़ रुपए ही खर्च किए गए हैं. यदि यह राशि समय पर खर्च हो, तो जिले के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों को भी इसका लाभ मिल सकता है. हालांकि, वर्ष 2016 से अब तक जिले में स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला एवं बाल विकास सहित एक हजार से अधिक परियोजनाओं पर काम किया गया है, लेकिन उपलब्ध राशि की तुलना में खर्च बेहद कम रहा है.
केस-2: सीहोर जिला
सीहोर जिले में डीएमएफ में करीब 5 करोड़ रुपए जमा हैं, लेकिन इस निधि से विभिन्न कार्यों के लिए 178 करोड़ रुपए से अधिक की राशि आवंटित की जा चुकी है. स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य विकास कार्यों से जुड़ी कुल 304 परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई, जिनमें से अब तक 50 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं. शेष परियोजनाएं अभी प्रक्रिया में हैं.
विधानसभा में उठा था मुद्दा
डिस्ट्रिक्ट माइनिंग फंड का मुद्दा विधानसभा में भी जमकर गरमाया था. इसकी मुख्य वजह विधायकों और स्थानीय प्रशासन के बीच फंड के उपयोग को लेकर लगातार बनी रहने वाली तनातनी रही है. इसी कारण कई बार स्थानीय विकास कार्य प्रभावित हुए. विधानसभा अध्यक्ष ने संबंधित विभागों और कलेक्टरों को निर्देश दिए थे कि वे विधायकों के साथ समन्वय बनाकर विकास कार्यों को समय पर पूरा करें. साथ ही जनहित से जुड़े कार्यों में डीएमएफ फंड का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए थे.
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