MP News: कांग्रेस से भाजपा में शामिल होने वाली विधायक पर जल्द फैसला, निर्मला सप्रे को लेकर विधानसभा अध्यक्ष ने की सुनवाई
विधायक निर्मला सप्रे(File Photo)
MP News: कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे की विधानसभा सदस्यता शून्य किए जाने के मामले में सियासी हलचल तेज हो गई है. विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर से मुलाकात के बाद नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार ने स्पष्ट किया कि इस प्रकरण में सभी संवैधानिक और कानूनी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया जाएगा. उन्होंने संकेत दिए कि आने वाले 8 से 15 दिनों के अंदर विधानसभा अध्यक्ष इस मामले में अंतिम फैसला सुना सकते हैं.
‘SC ने सरकार से किया है सवाल’
उमंग सिंगार ने बताया कि निर्मला सप्रे के मामले को लेकर उच्चतम न्यायालय ने सरकार से यह सवाल किया है कि अब तक क्या कार्रवाई की गई है. विधानसभा की ओर से कोर्ट को जवाब सौंपा गया है और इस विषय में सुप्रीम कोर्ट के कई पूर्व आदेश भी मौजूद हैं. इन्हीं आदेशों के आधार पर विधानसभा अध्यक्ष द्वारा सभी पक्षों को नोटिस जारी कर सुनवाई की जा रही है. नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि कांग्रेस की ओर से यह आपत्ति दर्ज कराई गई है कि निर्मला सप्रे ने सार्वजनिक रूप से भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में गतिविधियां कीं, जो दलबदल कानून का स्पष्ट उल्लंघन है. कांग्रेस ने इस संबंध में सभी आवश्यक दस्तावेज और प्रमाण विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष प्रस्तुत कर दिए हैं. उनका कहना है कि यह मामला सिर्फ एक विधायक तक सीमित नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और विधानसभा की गरिमा से जुड़ा हुआ है.
कोर्ट को गुमराह कर रही है भाजपा: उमंग सिंघार
उमंग सिंगार ने भाजपा पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि भाजपा बिना किसी विधायक को लिए सत्ता संतुलन को लेकर घबराई हुई है. उन्होंने कहा कि भाजपा को पता है कि यदि निष्पक्ष तरीके से चुनाव कराए गए तो प्रदेश की कई सीटें कांग्रेस के पक्ष में जाएंगी. इसी वजह से भाजपा रणनीति के तहत संवैधानिक प्रक्रियाओं को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है.
अध्यक्ष पर नेता प्रतिपक्ष को भरोसा
नेता प्रतिपक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा कानून का सहारा लेकर अदालत में अपने जवाब देती है, लेकिन कई बार कोर्ट को गुमराह करने का प्रयास करती है. हालांकि उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष की भूमिका को निष्पक्ष बताते हुए कहा कि स्पीकर ने सभी पक्षों को विस्तार से सुना है और पूरे मामले पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं. उन्होंने भरोसा जताया कि विधानसभा अध्यक्ष सभी तथ्यों और कानूनी प्रावधानों के आधार पर निष्पक्ष निर्णय लेंगे.
‘दो हफ्तों में होगा फैसला‘
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कांग्रेस स्पीकर की निष्पक्षता पर सवाल नहीं उठा रही है, बल्कि लोकतंत्र और संविधान की मर्यादा बनाए रखने की मांग कर रही है. अब प्रदेश की राजनीति की नजरें अगले दो हफ्तों में आने वाले फैसले पर टिकी हैं.