भोपाल: ट्विशा केस में आरक्षक की वीडियोग्राफी बनी ‘गेम चेंजर’, CBI ने की पुरस्कृत करने की सिफारिश
ट्विशा संदिग्ध मौत केस
भोपाल: राजधानी के बहुचर्चित ट्विशा केस की जांच में भोपाल पुलिस के आरक्षक राघवेंद्र सिंह पटेल की बनाई गई 34 मिनट की वीडियोग्राफी सबसे अहम साक्ष्य साबित हुई है. केंद्रीय जांच ब्यूरो ने आरक्षक की इस पेशेवर कार्यप्रणाली की सराहना करते हुए राज्य सरकार से उन्हें पुरस्कृत करने की सिफारिश की है.
मामला ट्विशा केस से जुड़ा है जिसकी जांच सीबीआई कर रही है. जांच के शुरुआती दौर में जब स्थानीय पुलिस घटनास्थल पर पहुंची थी, तब आरक्षक राघवेंद्र सिंह पटेल को वीडियोग्राफी की जिम्मेदारी दी गई थी. उन्होंने बेहद बारीकी से गिरिबाला सिंह के घर का ताला खुलने के क्षण से लेकर पूरे घटनास्थल को विधिवत सील किए जाने तक का लगातार 34 मिनट का वीडियो बनाया.
क्यों अहम है ये वीडियो?
सीबीआई सूत्रों के मुताबिक, अक्सर हाई-प्रोफाइल मामलों में क्राइम सीन से छेड़छाड़ या सबूतों से खेलने के आरोप लगते हैं. लेकिन इस केस में आरक्षक द्वारा बनाया गया बिना किसी कट का यह वीडियो ‘रियल टाइम डॉक्यूमेंटेशन’ है. इसमें घटनास्थल की एक-एक चीज अपनी मूल स्थिति में रिकॉर्ड हो गई. फर्नीचर की जगह, खिड़की-दरवाजों की स्थिति, सामान का बिखराव – सब कुछ कैमरे में कैद है.
सीबीआई ने जब केस टेकओवर किया तो इस वीडियो को महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में जब्त कर लिया. एजेंसी के अधिकारियों का कहना है कि इस एक वीडियो से उन्हें घटनास्थल की वास्तविक स्थिति समझने में बेहद मदद मिली. इससे फोरेंसिक टीम को भी अपना काम करने में आसानी हुई और जांच की सही दिशा तय हो सकी.
सीबीआई ने की सराहना
सीबीआई के वरिष्ठ अधिकारियों ने आरक्षक राघवेंद्र सिंह पटेल की ड्यूटी के प्रति निष्ठा और तकनीकी दक्षता की खुलकर तारीफ की है. एजेंसी ने माना कि अमूमन ऐसे मामलों में शुरुआती वीडियोग्राफी में कई तकनीकी खामियां रह जाती हैं, लेकिन राघवेंद्र द्वारा बनाया गया वीडियो प्रोफेशनल स्टैंडर्ड का है.
इसी आधार पर CBI ने राज्य सरकार को पत्र लिखकर आरक्षक राघवेंद्र सिंह पटेल को उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए पुरस्कृत किए जाने की अनुशंसा की है. CBI का मानना है कि ऐसे कर्मचारियों को प्रोत्साहित करने से बाकी पुलिस फोर्स में भी वैज्ञानिक तरीके से जांच करने का संदेश जाएगा.
फिलहाल ट्विशा केस की जांच जारी है और यह 34 मिनट का वीडियो केस की चार्जशीट में एक मजबूत कड़ी के रूप में शामिल किया जाएगा. यह मामला दिखाता है कि जमीनी स्तर पर की गई छोटी सी सावधानी भी बड़ी जांच में कितनी निर्णायक हो सकती है.
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