गले में तख्ती टांगकर और हाथ में घंटी लेकर निकला किसान, कहा- दफ्तरों के चक्कर काटकर थक गया, जानें पूरा मामला

किसान के मुताबिक करीब एक माह पहले पालखेड़ा गांव के कुछ लोग उसकी जमीन पर पहुंचे और खेत पर दावा जताया. इसके बाद उसने माचलपुर थाना, जीरापुर तहसील, एसडीएम कार्यालय और कलेक्टर कार्यालय तक शिकायतें कीं, लेकिन उसे राहत नहीं मिली.
A farmer came out in Rajgarhi wearing a placard around his neck and carrying a bell in his hand.

राजगढ़ी में गले में तख्ती टांगकर और हाथ में घंटी लेकर निकला किसान.

Input- मनीष सोनी

Rajgarh News: एक तरफ सरकारी रिकॉर्ड में उसके नाम जमीन दर्ज है, दूसरी तरफ उसे डर है कि जमीन हाथ से निकल जाएगी. शिकायतों के साथ कई दफ्तरों के चक्कर लगाने के बाद जब सुनवाई नहीं हुई तो 55 वर्षीय किसान देवी सिंह गुर्जर ने ऐसा रास्ता चुना, जिसने सोमवार को पूरे जिले का ध्यान अपनी ओर खींच लिया. किसान हाथ में घंटी और गले में अपनी व्यथा लिखी तख्ती टांगकर मुख्यमंत्री से न्याय मांगने भोपाल के लिए पैदल निकल पड़ा.

कोर्ट के फैसला सुनाने के बाद भी कब्जे की कोशिश

माचलपुर क्षेत्र के खेड़ी पटेल गांव निवासी देवी सिंह का कहना है कि उसके नाम 2 बीघा 4 बिस्वा पुश्तैनी जमीन है. जमीन को लेकर विवाद न्यायालय तक पहुंचा था और फैसला भी उसके पक्ष में आया. दस्तावेज और रिकॉर्ड उसके नाम हैं, लेकिन इसके बावजूद कुछ लोग जमीन पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं.

किसान के मुताबिक करीब एक माह पहले पालखेड़ा गांव के कुछ लोग उसकी जमीन पर पहुंचे और खेत पर दावा जताया. इसके बाद उसने माचलपुर थाना, जीरापुर तहसील, एसडीएम कार्यालय और कलेक्टर कार्यालय तक शिकायतें कीं, लेकिन उसे राहत नहीं मिली.

‘दफ्तरों के चक्कर काटकर थक गया हूं’

देवी सिंह का आरोप है कि एक कार्यालय उसे दूसरे कार्यालय भेजता रहा. कभी पुलिस के पास जाने को कहा गया, तो कभी राजस्व विभाग के पास. लगातार चक्कर लगाने के बाद उसे लगने लगा कि उसकी बात सुनने वाला कोई नहीं है.

इसी निराशा के बीच सोमवार सुबह करीब 5 बजे वह अपने भाई बने सिंह के साथ गांव से भोपाल के लिए पैदल रवाना हो गया. उसके गले में टंगी तख्ती पर लिखा था— “अधिकारी सुनते नहीं साहब, पैदल भोपाल जा रहा हूं, मुख्यमंत्री तो सुनेंगे. मेरी जमीन हड़पना चाहते हैं. राजगढ़ जाकर थक गया, अब भोपाल जा रहा हूं.’

42 किलोमीटर की दूरी तय करके पहुंचा किसान

रास्ते भर किसान हाथ में घंटी बजाता रहा. जो भी उसे देखता, उसकी नजर सबसे पहले तख्ती पर लिखे शब्दों पर जाती. राहगीर रुककर उससे बातचीत करते रहे और उसकी पूरी कहानी सुनते रहे.

करीब 42 किलोमीटर की दूरी तय कर दोपहर करीब तीन बजे किसान खिलचीपुर पहुंच गया. इसी दौरान उसके भोपाल पैदल जाने की जानकारी प्रशासन तक भी पहुंच गई. इसके बाद अधिकारियों ने सक्रियता दिखाई और खिलचीपुर-राजगढ़ मार्ग पर बड़ी पुलिया के पास उसे रोक लिया. तहसीलदार की ओर से वाहन भेजा गया और किसान को जीरापुर ले जाया गया.

किसान यात्रा नहीं बेबसी की तस्वीर!

सोमवार को यह सिर्फ एक किसान की पदयात्रा नहीं थी, बल्कि उस बेबसी की तस्वीर भी थी, जिसमें एक व्यक्ति कोर्ट का फैसला और जमीन के कागजात होने के बावजूद खुद को असुरक्षित महसूस करता है. हाथ में घंटी लेकर निकला किसान दरअसल अपनी आवाज शासन तक पहुंचाना चाहता था. उसकी यात्रा भले ही बीच रास्ते में रुक गई, लेकिन उसने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया कि आखिर एक फरियादी को अपनी बात सुनाने के लिए सड़क पर क्यों उतरना पड़ता है.

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