Bhopal: मगरमच्छों के बीच 30 साल का ‘सफर’ खत्म: कलियासोत डैम के पानी से हटने जा रहे मौत के बिजली टावर!

Bhopal: पिछले तीन दशकों से अधिक समय से बिजली ट्रांसमिशन टावरों तक पहुंचना किसी जोखिम भरे अभियान से कम नहीं है. हालांकि अब ये सिलसिला जल्द ही खत्म होने वाला है.
kaliyasot dam

कालियासोत डैम

Bhopal: पिछले तीन दशकों से अधिक समय से बिजली ट्रांसमिशन टावरों तक पहुंचना किसी जोखिम भरे अभियान से कम नहीं है. ऐसा इसलिए क्योंकि टेक्नीशियनोंको बिजली लाइनों का निरीक्षण और मरम्मत के लिए वहां तक पहुंचने के लिए कालियासोत डैम के मगरमच्छों से भरे बैकवाटर में नाव का सहारा लेना पड़ता था. लेकिन अब यह अजीबोगरीब और खतरनाक स्थिति जल्द ही बदलने वाली हैं.

डूब क्षेत्र से बाहर शिफ्ट करने का काम शुरू

दरअसल एमपी पावर ट्रांसमिशन कंपनी (MP Transco) ने मुख्य हाई-वोल्टेज लाइनों और टावरों को डैम के डूब क्षेत्र से बाहर शिफ्ट करने का काम शुरू कर दिया है. यह ट्रांसमिशन नेटवर्क लाइनें 1980 के दशक में बिछाई गई थीं और तब से नेटवर्क का हिस्सा बनी हुई थीं. इनमें से कई 132 केवी टावर ऐसे इलाकों में स्थित हैं जो कालियासोत डैम का जलस्तर बढ़ने पर पानी से घिर जाते थे, जिससे मेंटिनेंस टीमों के पास नाव के जरिए पहुंचने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचता था.

पानी में मगरमच्छों की मौजूदगी

डैम के पानी में मगरमच्छों की मौजूदगी ने सामान्य रखरखाव के काम को बेहद जोखिमभरा बना दिया था. हालांकि राहत भरी खबर ये है कि अब यहां लगे टावरों को सुरक्षित जगह पर शिफ्ट करने का काम तेज कर दिया गया है. अधिकारियों का कहना है कि मानसून के दौरान काम की गति थोड़ी सी धीमी पड़ सकती है, लेकिन इस साल के अंत तक इस परियोजना के पूरा होने की पूरी जिम्मेदारी है.

नील तिवारी ने कहा….

नील तिवारी, प्रबंध निदेशक, एमपी ट्रांसको ने कहा ‘इससे शहर के एक बडे़ हिस्से को फायदा होगा. पहले जब भी मेंटेनेंस की जरुरत होती थी, तो हमारी टीमों को नाव से यात्रा करनी पड़ती थी, क्योंकि लाइनें डैम के बैकवाटर से गुजरती थीं. यह हमारे सिस्टम को और सुव्यवस्थित करने के प्रयासों का हिस्सा है.

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