21 साल बाद भोपाल के मास्टर प्लान को मिली हरी झंडी, जानें सीलिंग की कार्रवाई को लेकर अदालत ने कहा
फाइल फोटो
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के मास्टर प्लान ने नए ड्राफ्ट को सुप्रीम कोर्ट द्वारा मंजूरी मिल गई है. ये मास्टर प्लान 21 साल से अटका हुआ है. कोर्ट ने शहर के रहवासी क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों और सीलिंग से जुड़े मामले को लेकर हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को मास्टर प्लान का ड्राफ्ट जारी करने की मंजूरी दे दी है.
कोर्ट को जानकारी देना जरूरी
हालांकि कोर्ट ने ये निर्देश भी दिया है कि फाइलन मास्टर प्लान जारी करने से पहले कोर्ट को इसकी जानकारी देनी होगी. न्यायालय की अनुमित मिलने के बाद ही फाइनल मास्टर प्लान जारी किया जाएगा. सीलिंग की कार्रवाई पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट लापरवाही की शिकायतों पर नाराजगी जताई है, साथ ही आदेशों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए है.
प्रभावी ढ़ंग से जारी रखने के निर्देश
सील किए गए प्रतिष्ठानों के सुबह बंद और शाम को दोबारा खुलने की शिकायतों पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है. इस सुनवाई के पहले रहवासियों की ओर से ऐसी 9 शिकायतें पेश हुई थीं. इसके बाद कोर्ट ने नगर निगम को सीलिंग की कार्रवाई प्रभावी ढ़ंग से जारी रखने के निर्देश दिए हैं.
मामले में मध्यप्रदेश सरकार की ओर से बनाई गई समिति को लेकर भी सुनवाई में चर्चा हुई. विवेक त्रिपाठी के मुताबिक, कोर्ट ने समिति को लेकर नाराजगी जताई और पहले बनाई गई समिति को भंग कर दिया गया है. अब नगर निगम को अपने स्तर पर कार्रवाई जारी रखने के निर्देश हैं.
2005 के मास्टर प्लान लागू
गौरतलब है कि भोपाल में फिलहाल वर्ष 2005 के मास्टर प्लान के आधार पर विकास गतिविधियां संचालित हो रही हैं. करीब दो दशक से नए मास्टर प्लान को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका है. ऐसे में नए ड्राफ्ट के प्रकाशन की अनुमति को राजधानी के शहरी विकास की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है.
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