ग्वालियर को मिला देश का पहला Telecom Manufacturing Zone, अब दूरसंचार में चंबल क्षेत्र बनेगा अग्रणी

देश की राजधानी दिल्ली में मध्य प्रदेश सरकार और केंद्रीय दूरसंचार विभाग के बीच एक बड़ा एमओयू हुआ है. जिसके तहत ग्वालियर में देश का पहला इंटीग्रेटेड टेलीकॉम टेक्नोलॉजी ईकोसिस्टम स्थापित होने जा रहा है.
Gwalior News

ग्वालियर में बनेगा टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन

केन्द्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया तथा मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की गरिमामयी उपस्थिति में भारत सरकार के दूरसंचार विभाग एवं मध्य प्रदेश शासन के उद्योग विभाग के बीच ग्वालियर में देश के पहले Telecom Manufacturing Zone (TMZ) की स्थापना हेतु समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए. सिंधिया के विशेष प्रयासों से मुख्यमंत्री मोहन के सहयोग से ग्वालियर को देश के पहले Telecom Manufacturing Zone की ऐतिहासिक सौगात मिली है.

इस अवसर पर सिंधिया ने कहा कि ग्वालियर में देश के पहले Telecom Manufacturing Zone की स्थापना मध्य प्रदेश और भारत, दोनों के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है. यह परियोजना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया एवं विकसित भारत–2047 के संकल्प को नई गति प्रदान करेगी और भारत को वैश्विक दूरसंचार विनिर्माण के क्षेत्र में नई पहचान दिलाएगी. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्य प्रदेश तेज़ी से औद्योगिक विकास और आत्मनिर्भरता के पथ पर अग्रसर है तथा यह TMZ उसी दूरदर्शी नेतृत्व और विकासोन्मुखी सोच का सशक्त प्रतीक है.

350 एकड़ में विकसित होगा देश का पहला Telecom Manufacturing Zone

केन्द्रीय मंत्री सिंधिया ने बताया कि आज हमें टेलीकॉम के क्षेत्र में सेवा प्रदाता से उत्पादक बनने की ओर बढ़ना होगा और उत्पादक बनने के लिए हमारे पास स्वदेशी ईकोसिस्टम होना आवश्यक है. यह टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन उसी दिशा में बड़ी उपलब्धि है. दूरसंचार विभाग की इस महत्वाकांक्षी परियोजना को ग्वालियर में लगभग 350 एकड़ क्षेत्र में अत्याधुनिक Plug-and-Play मॉडल पर विकसित किया जाएगा. परियोजना के प्रथम चरण के आधारभूत अवसंरचना विकास के लिए भारत सरकार ने ₹500 करोड़ की शत-प्रतिशत वित्तीय सहायता स्वीकृत की है.

देश के पहले Telecom Manufacturing Zone में दूरसंचार विनिर्माण के लिए विश्वस्तरीय औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया जाएगा. उल्लेखनीय है कि इस एकीकृत परिसर में मोबाइल फोन, नेटवर्क उपकरण, फाइबर ऑप्टिक्स, सेमीकंडक्टर, 5G एवं 6G तकनीकों के अनुसंधान, विकास और विनिर्माण की अत्याधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी. अनुसंधान से लेकर डिज़ाइन, परीक्षण और उत्पादन तक की संपूर्ण मूल्य श्रृंखला एक ही परिसर में उपलब्ध होने से भारत के दूरसंचार क्षेत्र को नई गति और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता प्राप्त होगी.

ग्वालियर बनेगा निवेश और उद्योग का नया केंद्रः सिंधिया

सिंधिया ने इस परियोजना के उच्चस्तरीय और दीर्घकालिक लाभों का उल्लेख करते हुए कहा कि इस परियोजना के माध्यम से मध्य प्रदेश में ₹9 हजार करोड़ तक के कुल निवेश का अनुमान है और इससे लगभग 10 हजार से अधिक दीर्घकालिक रोजगार के अवसर सृजित होंगे. इसके साथ ही केन्द्रीय मंत्री ने बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि अकेले प्रथम चरण में ही डिक्सन टेक्नोलॉजीज, एचएफसीएल और तेजस नेटवर्क जैसी अन्य अग्रणी कंपनियों द्वारा लगभग ₹2 हजार करोड़ का निवेश किया जा रहा है और यहां 4,500 से अधिक रोजगार के अवसर बनेंगे. इस निवेश से हमारे ग्वालियर-चंबल के युवाओं को उनके घर में ही उच्च-वेतन रोजगार के अवसर मिलेंगे.

परियोजना के प्रभावी संचालन एवं क्रियान्वयन के लिए मध्य प्रदेश शासन की 51 प्रतिशत तथा दूरसंचार विभाग की 49 प्रतिशत भागीदारी के साथ एक स्पेशल पर्पज व्हीकल (SPV) का गठन किया जाएगा. इससे परियोजना को संस्थागत मजबूती मिलेगी तथा निवेश, विकास और संचालन की प्रक्रिया को गति प्राप्त होगी.

”हमें विश्व पर निर्भर देश से विश्व भारत पर निर्भर बनाने की ओर बढ़ना है: सिंधिया”

कार्यक्रम के अंत में केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के आत्मनिर्भर भारत के विजन के तहत देश के पहले Telecom Manufacturing Zone की स्थापना केवल एक औद्योगिक परियोजना नहीं, बल्कि भारत के तकनीकी भविष्य की मजबूत आधारशिला है. यह सहकारी संघवाद का एक उत्कृष्टतम उदाहरण है जहां केन्द्र और प्रदेश सरकार मिलकर एक राष्ट्रीय परियोजना स्थापित करने जा रही है. सिंधिया ने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि हमें विश्व पर निर्भर देश से विश्व भारत पर निर्भर बनाने की ओर बढ़ना है.

यह परियोजना मध्य प्रदेश को देश के प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक्स एवं दूरसंचार विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करेगी तथा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत को वैश्विक दूरसंचार विनिर्माण शक्ति बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर सिद्ध होगी.

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