MP: नामांकन रद्द होने के बाद मीनाक्षी नटराजन के पास क्‍या व‍िकल्‍प? मिल पाएगा मौका या कांग्रेस से हो गई सबसे बड़ी ‘चूक’

Congress MP Rajya Sabha Nomination Cancelled: मध्य प्रदेश कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज कर द‍िया गया है. ऐसे में हम समझते हैं कि अब उनके पास कौन-कौन से विकल्प बचे हैं और कौन सी प्रक्रिया सबसे आसान और जल्द निराकरण दिला सकती है.
मीनाक्षी नटराजन

मीनाक्षी नटराजन

Meenakshi Natarajan Nomination : मध्य प्रदेश की राजनीति में 9 जून का दिन काफी अहम रहा है. इसके साथ ही कांग्रेस के लिए सबसे बड़े सीख के साथ बीजेपी के लिए एक राज्‍यसभा सीट ब‍िना क‍िसी मेहनत के जीतने का मौका मिला है. सोमवार 9 जून शाम को 5:30 बजे बीजेपी की आपत्ति के बाद चुनाव आयोग के अध‍िकार‍ियों ने कांग्रेस की राज्‍यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र खारिज कर दिया.

इस फैसले के बाद जहां कांग्रेस ने इसे ‘लोकतंत्र की हत्या’ करार दिया है, वहीं बीजेपी इसे पूरी तरह न्यायसंगत बता रही है. इस फैसले के बाद अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या मीनाक्षी और कांग्रेस के पास अब कोई विकल्प बचा भी है या नहीं? ऐसे में हम समझते हैं कि अभी क्‍या-क्‍या करने मीनाक्षी को राहत मिल सकती है.  

मीनाक्षी और कांग्रेस के पास अब क्या विकल्प?

चुनाव आयोग से समीक्षा की मांग

नामांकन पत्र खारिज होने के बाद अब मीनाक्षी को चुनाव आयोग से ही राहत मिल सकती है. यही वजह है कि दिल्ली हो या भोपाल नामांकन खारिज होने के बाद कांग्रेस ने ऑफिस के बाहर प्रदर्शन शुरू कर द‍िया था. कांग्रेस चुनाव आयोग से एक बार फिर से समीक्षा की मांग कर सकता है. इसमें वह अपना पक्ष रखकर बता सकती है कि पूरा मामला निजी शिकायत का है. यानी किसी भी तरह के मामले का नहीं है. जिस तरह का दावा किया जा रहा है. इसलिए शपथ पत्र में इसकी जानकारी देना जरूरी नहीं था. अगर चुनाव आयोग चाहे तो यह बात मानकर एक बार फ‍िर मौका दे सकता है.

हाईकोर्ट में आदेश को चुनौती

इस तरह के जब-जब मामले सामने आते हैं सभी राजनीतिक दल कोर्ट की तरफ ही जाते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि यहां पर उनकी दलीलों को सुनने के साथ-साथ उन पर हर तरह से विचार किया जाता है. कांग्रेस और मीनाक्षी भी ऐसा ही कर सकती हैं. याचिका दायर कर रिटर्निंग ऑफिसर (RO) के आदेश को चुनौती दे सकती है. ऐसा कहा जाता है कि यह प्रक्रिया सबसे तेज और सबसे कारगर होती है. इसमें यह भी होता है कि ज्यादातर उम्मीदवार को राहत मिल जाती है.

चुनाव परिणामों को चुनौती

नामांकन पत्र को लेकर जिस तरह के आरोप लगे हैं. उस पर सबसे जटिल प्रक्रिया चुनाव नतीजों को चुनौती देना होती है.  इस प्रक्रिया में सबसे ज्यादा समय लगता है. अगर इसको चुनौती दी जाती है तो पहले तो चुनाव परिणाम का इंतजार करना होगा. इसके बाद ही इस पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है. इस प्रक्रिया में चुनाव और नतीजे के बाद कांग्रेस इलेक्शन पिटीशन के जरिए परिणाम को चुनौती दे सकती है.

तीसरी सीट पर बीजेपी ने उतारा था उम्मीदवार

मध्य प्रदेश राज्यसभा की तीन सीटों पर चुनाव होना है. दो सीटें बीजेपी के खाते में जाना तय है. तीसरी सीट पर बीजेपी ने महेश केवट को अपना उम्मीदवार घोषित किया था. केवट और मीनाक्षी के बीच मुकाबला था. अब नामांकन रद्द होने के बाद केवट का राज्यसभा में जाने का रास्ता साफ होता नजर आ रहा है.  

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