रायसेन में लगी ‘नागों की अदालत’, नागपंचमी पर शेषनाग के सामने हुआ न्याय, आस्था और अंधविश्वास के बीच सवाल, जानें पूरा मामला

MP News: रायसेन जिले की गैरतगंज तहसील के सिद्ध क्षेत्र श्रीराम रसियाधाम, सीहोरा खुर्द में इस साल फिर नागपंचमी के अवसर पर नागों की अदालत लगी.
Sihora Temple

सीहोरा मंदिर

MP News: मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में एक ऐसी अदालत लगती है, जहां न कोई वकील होता है और न ही कोई जज, फिर भी पीड़ित को न्याय मिलने का दावा किया जाता है. यह अदालत है नागों की अदालत, जहां शेषनाग के सामने सत्य-असत्य का न्याय होता है. अब इसे लोगों की श्रद्धा कहें या अंधविश्वास, इसका फैसला आप स्वयं ही कर सकते हैं.

नागपंचमी पर फिर लगी नागों की अदालत

रायसेन जिले की गैरतगंज तहसील के सिद्ध क्षेत्र श्रीराम रसियाधाम, सीहोरा खुर्द में इस साल फिर नागपंचमी के अवसर पर नागों की अदालत लगी. यह आयोजन हर साल सीहोरा खुर्द में होता है. आयोजन के दौरान सर्पदंश से पीड़ित रहे लोगों के शरीर में नागों की आत्मा के प्रवेश करने और उनके काटने का कारण बताने का दावा किया गया. ये लोग नागों द्वारा सताए जाने के बाद सीहोरा दरबार में पहुंचे थे. अपने तरह के अनोखे और चमत्कारिक माने जाने वाले इस आयोजन को देखने के लिए दूर-दराज से बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचे.

ग्राम सीहोरा में नागदेव का चबूतरा है, जहां प्रतिवर्ष नागपंचमी के मौके पर नागों की अदालत लगती है. क्षेत्र भर में हो रही तेज बारिश के बावजूद इस आयोजन में हजारों की संख्या में लोग जुटे. आयोजन में रायसेन जिले के सिलवानी, बरेली, उदयपुरा, सुल्तानपुर, औबेदुल्लागंज, बेगमगंज सहित अन्य स्थानों के अलावा सीहोर, भोपाल और सागर से भी बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए.

नागदेव के चबूतरे पर हुई ‘पेशी’

सीहोरा स्थित नागदेव के चबूतरे पर नागों की अदालत लगी. दूर-दराज के दर्जनों लोग, जो बीते वर्षों में सर्पदंश से पीड़ित रहे थे, यहां पहुंचे. पंडाजी अजब सिंह की मौजूदगी में बारी-बारी से दर्जनभर से अधिक पीड़ितों के शरीर में नागों की आत्मा के प्रवेश करने का दावा किया गया. इसके बाद प्रविष्ट नाग की आत्मा ने संबंधित व्यक्ति को काटने का कारण बताया. इस दौरान यह भी दावा किया गया कि नाग की आत्मा ने भविष्य में किसी व्यक्ति को पीड़ा नहीं पहुंचाने की वचनबद्धता जताई.

परिजनों ने बताया- ‘गांसी बंधवाने के बाद आराम मिला’

मौके पर मौजूद सर्पदंश से पीड़ित रहे व्यक्तियों के परिजन गंगाराम, वेदप्रकाश, लक्ष्मीबाई, आदेश, जयराम आदि ने मीडिया प्रतिनिधियों से चर्चा करते हुए बताया कि वे नाग के सताए हुए लोगों को सीहोरा दरबार में लेकर आए थे. परिजनों के मुताबिक, यहां से ‘गांसी’ बंधवाने के बाद उन्हें आराम मिला था. यहां की परंपरा के अनुसार अब नागपंचमी के अवसर पर वे इस आयोजन में शामिल होने के लिए पहुंचे हैं. इस आयोजन को देखने के लिए क्षेत्र सहित दूर-दराज के श्रद्धालु बड़ी संख्या में सीहोरा खुर्द पहुंचे.

आस्था और अंधविश्वास के बीच बड़ा सवाल

आधुनिक युग में जहां भारत चांद पर अपनी पहुंच बना रहा है, वहीं अंधविश्वासों को तोड़कर विज्ञान ने भी काफी प्रगति की है. गंभीर बीमारियों के अत्याधुनिक इलाज की खोज हो चुकी है और लोगों के जीवन को बचाने के लिए चिकित्सा विज्ञान लगातार आगे बढ़ रहा है. इन परिस्थितियों के बावजूद आज भी लोगों की आस्था इस प्रकार के अनोखे आयोजनों से जुड़ी हुई है.

सीहोरा खुर्द में वर्षों से नागपंचमी पर हो रहे इस आयोजन में लोगों की बड़ी संख्या में मौजूदगी इसी आस्था का प्रतीक है. हालांकि, ऐसे आयोजनों को लेकर आस्था और अंधविश्वास के बीच की बहस भी लगातार बनी हुई है. नागों की अदालत में लोगों का जुटना इसी बहस को एक बार फिर सामने लाता है.

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