कौन हैं IAS अंशुमन राज? जिन्होंने उजागर किया फिनाइल घोटाला, मासूमों की जान बचाने के लिए बनाया ‘सुपर AI मॉडल’
IAS अंशुमन राज
आपने कई बार ऐसे प्रशासनिक अधिकारियों की कहानी या काम करने के तरीके के बारे में सुना होगा जो अपनी कार्यशैली और लीक से हटकर कुछ विशेष कर जाते हैं. ऐसे अधिकारियों को उस इलाके के लोग और प्रशासन हमेशा याद रखते हैं और उनके द्वारा किए गए काम की हमेशा सराहना की जाती है. आज हम आपको मध्य प्रदेश प्रशासनिक सेवा के एक ऐसे ही अधिकारी, आईएएस अंशुमन राज के बारे में बताने जा रहे हैं.
2020 बैच के आईएएस अधिकारी
अंशुमन राज 2020 बैच के आईएएस अधिकारी हैं. वह वर्तमान में मध्य प्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (MPSEDC) में एडिशनल मैनेजिंग डायरेक्टर के रूप में सेवाएं दे रहे हैं. IAS अंशुमन राज हाल ही में दो वजहों से चर्चा में आए हैं. पहली ये कि उन्होंने एक जीवन रक्षक मशीन लर्निंग एआई मॉडल तैयार किया है और दूसरी वजह है कि उन्होंने हाल ही में नगरीय निकायों की खरीद में हुए भ्रष्टाचार को एक तकनीकी प्रेजेंटेशन के जरिए बेनकाब किया है.
जीवन रक्षक मशीन लर्निंग एआई मॉडल
सबसे ज्यादा चर्चा उनके द्वारा तैयार किए गए जीवन रक्षक मशीन लर्निंग एआई मॉडल की हो रही है. लेकिन इसके पीछे उनसे जुड़ी साल 2023 में हुई एक बेहद दर्दनाक घटना है जिसे वह अब तक नहीं भुला पाए हैं। दरअसल, उस वक्त अंशुमन राज अपनी पहली पोस्टिंग के दौरान नरसिंहगढ़ में एसडीएम के पद पर तैनात थे. तभी राजगढ़ जिले के एक गांव में एक पांच साल का बच्चा गहरे बोरवेल में गिर गया था, जिसे तमाम कोशिशों के बाद भी नहीं बचाया जा सका और उसे मृत अवस्था में बाहर निकाला गया.
अब भी नहीं भूल पाए वह घटना
उस वक्त तत्कालीन कलेक्टर हर्ष दीक्षित के नेतृत्व में चले बचाव अभियान पर करीब से नजर रखने वाले अंशुमन राज उस पल को याद करके आज भी सिहर उठते हैं. इसी दौरान उन्होंने ठान लिया था के वे कुछ ऐसा करेंगे जिससे भविष्य में ऐसी घटनाएं न हो और किसी भी मासूम की मौत न हो.
बड़े पैमाने पर विस्तार की तैयारी
बस फिर क्या था, मशीन इंजीनियरिंग की पृष्ठभूमि रखने वाले आईएएस अंशुमन राज ने अपनी तकनीकी समझ का उपयोग करते हुए एक मशीन लर्निंग मॉडल तैयार किया है. इस मॉडल ने सैटेलाइट इमेजरी और जीआईएस डेटा की मदद से राजगढ़ जिले में मात्र एक हफ्ते के भीतर 650 पटवारियों की मदद से 23,000 से अधिक बोरवेल और कुओं का व्यापक सर्वेक्षण किया. इसके बाद असुरक्षित बोरवेल और कुओं को बंद कराया गया. अब इस तकनीक का बड़े पैमाने पर विस्तार करने की तैयारी की जा रही है.
अंशुमन राज के एनालिसिस में चौंकाने वाले खुलासे
दूसरी तरफ, MPSEDC के एडिशनल एमडी अंशुमन राज की ओर से दिए गए प्रेजेंटेशन में मध्य प्रदेश में बड़े घोटाले को उजागर किया गया है. उन्होंने अपने प्रेजेंटेशन के दौरान बताया कि जहां एक निकाय ने कचरा गाड़ी दो लाख रुपये में खरीदी, वहीं दूसरे निकाय ने वही गाड़ी 4 डस्टबिन के साथ 6 लाख रुपये में खरीदी. इसी में बताया गया कि कुछ जगहों पर 200 एलईडी बल्ब 60 लाख रुपये में खरीदे गए तो कहीं पर 33,000 रुपये प्रति लीटर की दर से 5 रुपये प्रति लीटर वाली फिनाइल खरीदी गई. यह मामला भी फिलहाल चर्चा का विषय बना हुआ है.
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