‘माफिया ने रास्ते बदले, चंबल में नहीं रुका अवैध खनन’, सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को लगाई फटकार, SC ने कहा- गुमराह किया जा रहा

MP News: मामले में मध्य प्रदेश सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्य भाटी और एएसजी रजू ने पक्ष रखा. उन्होंने कहा कि यदि मीडिया रिपोर्ट सही है तो यह वास्तव में “चौंकाने वाला” मामला है. इसके बाद कोर्ट ने राज्य सरकार से ताजा हलफनामा दाखिल कर विस्तृत जवाब मांगा है.
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चंबल नदी में अवैध रेत खनन के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को लगाई फटकार

MP News: (मुरैना से मनोज शर्मा की रिपोर्ट) मुरैना के राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य क्षेत्र में जारी अवैध रेत खनन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार पर सख्त नाराजगी जताई है. कोर्ट ने साफ कहा कि सख्ती के बाद रेत माफियाओं ने अपने रास्ते जरूर बदल लिए, लेकिन अवैध खनन अब भी बंद नहीं हुआ. मामले में मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए कोर्ट ने सरकार से तीखे सवाल पूछे हैं.

अदालत ने माना – मामला गंभीर है

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि यदि मीडिया रिपोर्ट में दिखाया गया अवैध रेत परिवहन और बिना नंबर वाले वाहनों का संचालन सही पाया जाता है, तो इसका सीधा मतलब होगा कि राज्य सरकार ने कोर्ट को गलत जानकारी दी है. अदालत ने इसे बेहद गंभीर मामला माना है.

कोर्ट ने जताई नाराजगी

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में पेश की गई कॉम्प्लायंस एफिडेविट में मध्यप्रदेश सरकार की ओर से दावा किया गया था कि अवैध रेत परिवहन और बिना नंबर प्लेट वाले ट्रैक्टर-ट्रॉलियों पर कार्रवाई की जा रही है. मीडिया रिपोर्ट्स और जमीन पर सामने आ रही तस्वीरें इस दावे के उलट दिखाई दे रही हैं. कोर्ट ने इसी विरोधाभास पर नाराजगी जाहिर की.

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि चंबल क्षेत्र में अवैध खनन केवल कानून व्यवस्था का मामला नहीं है, बल्कि यह संरक्षित वन्यजीवों और पर्यावरण के लिए भी बड़ा खतरा बन चुका है. कोर्ट ने कहा कि घड़ियाल अभयारण्य जैसे संवेदनशील क्षेत्र में लगातार अवैध रेत उत्खनन चिंताजनक है और यदि यह जारी रहा तो कठोर निर्देश जारी किए जा सकते हैं.

राज्य की कार्रवाई पर असंतोष

मामले में मध्य प्रदेश सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्य भाटी और एएसजी रजू ने पक्ष रखा. उन्होंने कहा कि यदि मीडिया रिपोर्ट सही है तो यह वास्तव में “चौंकाने वाला” मामला है. इसके बाद कोर्ट ने राज्य सरकार से ताजा हलफनामा दाखिल कर विस्तृत जवाब मांगा है.

बताया गया कि इससे पहले 20 मई को राजस्थान के पांच जिलों और मध्य प्रदेश के परिवहन सचिव मनीष सिंह कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश हुए थे. उस दौरान सरकार ने अवैध रेत परिवहन रोकने के लिए कार्रवाई का दावा किया था लेकिन सुप्रीम कोर्ट पहले भी राज्य की निगरानी व्यवस्था पर असंतोष जता चुका है.

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चंबल क्षेत्र में अवैध रेत खनन बड़ा मुद्दा

चंबल क्षेत्र में अवैध रेत खनन लंबे समय से बड़ा मुद्दा बना हुआ है. स्थानीय स्तर पर लगातार शिकायतें मिलती रही हैं कि बिना नंबर वाले ट्रैक्टर-ट्रॉली रात के अंधेरे में रेत का परिवहन कर रहे हैं. अब सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद प्रशासनिक तंत्र पर भी बड़े सवाल खड़े हो गए हैं. कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में अवैध रेत खनन के खिलाफ बड़े स्तर पर कार्रवाई देखने को मिल सकती है.

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