मुरैना में वर्षों से नहीं खुला पशु कृत्रिम गर्भाधान केंद्र, स्थानीय लोगों ने बना दिया शौचालय, घरों में दी जा रही पानी की सप्लाई

MP News: स्थानीय लोगों के अनुसार केंद्र में पदस्थ डॉ. एमएल खरे लंबे समय से अस्पताल नहीं पहुंच रहे हैं. हालत यह है कि अस्पताल के मुख्य गेट के पास लोगों ने खुले में शौच करना शुरू कर दिया है. भवन के बरामदे में गहरा गड्ढा हो चुका है, जिससे भवन भी क्षतिग्रस्त होता दिखाई दे रहा है.
Morena Animal Artificial Insemination Center Has Remained Unopened for Years

मुरैना: वर्षों से नहीं खुला पशु कृत्रिम गर्भाधान केंद्र

MP News: (मुरैना से मनोज शर्मा की रिपोर्ट) मध्य प्रदेश सरकार द्वारा गांव और वार्ड स्तर पर पशुपालकों की सुविधा के लिए बनाए गए पशु कृत्रिम गर्भाधान केंद्र अब कई जगह बदहाली का शिकार होते नजर आ रहे हैं. मुरैना शहर के वार्ड क्रमांक-2 बड़ोखर स्थित जीडी जैन हायर सेकेंडरी स्कूल परिसर में बना पशु कृत्रिम गर्भाधान केंद्र वर्षों से बंद पड़ा है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि यहां पदस्थ डॉक्टर और कर्मचारियों की लापरवाही के चलते केंद्र पूरी तरह बदहाल हो चुका है.

भवन हुआ क्षतिग्रस्त

स्थानीय लोगों के अनुसार केंद्र में पदस्थ डॉ. एमएल खरे लंबे समय से अस्पताल नहीं पहुंच रहे हैं. हालत यह है कि अस्पताल के मुख्य गेट के पास लोगों ने खुले में शौच करना शुरू कर दिया है. भवन के बरामदे में गहरा गड्ढा हो चुका है, जिससे भवन भी क्षतिग्रस्त होता दिखाई दे रहा है.

सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि अस्पताल परिसर की पानी की टंकी और जल स्रोत का उपयोग अस्पताल में नहीं हो रहा, बल्कि पास के एक मकान में टंकी से पानी की सप्लाई दी जा रही है. पड़ोसियों ने बताया कि डॉक्टर की अनुमति से उन्होंने अपने घर तक नल कनेक्शन कराया है.

डॉक्टर कभी कभार आते हैं- स्थानीय

स्थानीय लोगों का कहना है कि डॉक्टर कभी-कभार आते हैं, लेकिन केवल औपचारिकता निभाकर वापस लौट जाते हैं. जब विस्तार न्यूज़ के संवाददाता ने मामले की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाई, तो कुछ ही देर में डॉक्टर मौके पर पहुंचे और अस्पताल गेट के सामने फैली गंदगी और मल-मूत्र की सफाई करते दिखाई दिए. अस्पताल के अंदर निरीक्षण के दौरान दवाओं के नाम पर केवल कुछ इंजेक्शन मिले, जबकि दवा रखने वाली ट्रे और सामान पर मोटी धूल जमी हुई थी.

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इससे साफ प्रतीत होता है कि केंद्र में नियमित रूप से कोई चिकित्सकीय गतिविधि नहीं हो रही. पड़ोस में रहने वाले एक स्थानीय निवासी तोमर साहब ने बताया कि उन्होंने आज तक यहां किसी डॉक्टर को नियमित रूप से कार्य करते नहीं देखा. उनका कहना था कि अस्पताल की हालत खुद इस बात की गवाही दे रही है कि यहां की सेवाएं केवल कागजों में संचालित हो रही हैं.

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