MP News: एमपी में राहुल गांधी का संगठन सृजन अभियान फ्लॉप, कांग्रेस में बड़ा एक्शन तय,10 से ज्यादा जिलाध्यक्षों की छुट्टी संभव
एमपी कांग्रेस मुख्यालय
MP News: मध्य प्रदेश कांग्रेस में संगठनात्मक फेरबदल की तैयारी तेज हो गई है. सूत्रों के मुताबिक, परफॉर्मेंस रिपोर्ट की समीक्षा के बाद 10 से ज्यादा जिलाध्यक्षों की छुट्टी तय मानी जा रही है. चार दिन तक चली समीक्षा और वन-टू-वन चर्चा के बाद रिपोर्ट तैयार कर ली गई है, जिसके आधार पर जल्द कार्रवाई हो सकती है. खास बात यह है कि जिन नेताओं को सीधे शीर्ष नेतृत्व ने जिलाध्यक्ष बनाया था, उनमें से कई की रिपोर्ट भी कमजोर आई है.
डिंडोरी के ओंकार सिंह मरकाम, सतना ग्रामीण के सिद्धार्थ कुशवाहा और मंडला के अशोक मर्सकोले को डेंजर जोन में बताया जा रहा है. इसके अलावा ग्वालियर ग्रामीण, रतलाम शहर, मंदसौर, अनूपपुर, दतिया, रीवा ग्रामीण, मऊगंज और आगर मालवा जिलों के अध्यक्षों की परफॉर्मेंस भी खराब पाई गई है.
संगठन में बदलाव लगभग तय
हालांकि सूत्रों का कहना है कि कुछ जिलाध्यक्ष जातिगत और राजनीतिक समीकरणों के चलते बच सकते हैं, लेकिन संगठन में बड़े बदलाव लगभग तय हैं. करीब 8 महीने पहले ही संगठन सृजन अभियान के तहत इन जिलाध्यक्षों की नियुक्ति की गई थी, जिसके बाद अब उनकी कार्यशैली का आकलन किया गया है.
जिलाध्यक्षों की समीक्षा के लिए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) की ओर से वामसी चंद रेड्डी को प्रदेश में भेजा गया था. उन्होंने जिले-दर-जिले जाकर पदाधिकारियों से चर्चा की और फीडबैक लिया. सूत्रों के मुताबिक, कुछ जिलाध्यक्षों ने अपने कामकाज की रिपोर्ट तक समय पर कनेक्ट सेंटर को नहीं भेजी, जिससे उनकी स्थिति और कमजोर हो गई.
इन बिंदुओं पर हुई समीक्षा
- जिला से लेकर ब्लॉक, मंडल, पंचायत और वार्ड स्तर तक संगठन का विस्तार
- AICC और PCC के कार्यक्रमों का क्रियान्वयन
- जिलों में दौरे और कार्यक्रमों की संख्या
- प्रेस कॉन्फ्रेंस और जिला कार्यकारिणी की बैठकों की आवृत्ति
- स्थानीय और राष्ट्रीय मुद्दों पर धरना-प्रदर्शन
- कनेक्ट सेंटर को रिपोर्टिंग की स्थिति
- जिला कार्यालय की उपलब्धता और स्थिति
सूत्रों के अनुसार, जिन जिलाध्यक्षों का प्रदर्शन इन मापदंडों पर कमजोर पाया गया है, उनके खिलाफ जल्द ही कार्रवाई हो सकती है. संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने के लिए कांग्रेस नेतृत्व सख्त रुख अपनाने के मूड में नजर आ रहा है.
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