विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटे अजय सिंह, पुराने कांग्रेसियों को साधने की कवायद, चंबल-बुंदेलखंड का कर रहे दौरा

MP News: फरवरी में उन्होंने चंबल अंचल के ग्वालियर, मुरैना, भिंड और दतिया में संगठन की नब्ज टटोली. इसके बाद उन्होंने बुंदेलखंड का रुख किया और निवाड़ी, टीकमगढ़ समेत अन्य जिलों में कार्यकर्ताओं से मुलाकात की.
Congress MLA Ajay Singh Engaged in Preparations for the 2028 Madhya Pradesh Assembly Elections

विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटे कांग्रेस विधायक अजय सिंह

MP News: मध्य प्रदेश की सियासत में एक बार फिर सक्रिय होते नजर आ रहे पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह इन दिनों संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं. लंबे समय तक विंध्य तक सीमित रहने वाले अजय सिंह अब प्रदेश के दूसरे संभागों में पहुंचकर पुराने कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को एकजुट करने की कोशिश में जुटे हैं.

चंबल-बुंदेलखंड के दौरे पर अजय सिंह

सूत्रों के अनुसार, अजय सिंह पिछले एक महीने से लगातार दौरे कर रहे हैं. फरवरी में उन्होंने चंबल अंचल के ग्वालियर, मुरैना, भिंड और दतिया में संगठन की नब्ज टटोली. इसके बाद उन्होंने बुंदेलखंड का रुख किया और निवाड़ी, टीकमगढ़ समेत अन्य जिलों में कार्यकर्ताओं से मुलाकात की. 16 मार्च को बुंदेलखंड दौरे के दौरान अजय सिंह ने ओरछा में रामराजा सरकार के दर्शन भी किए. इसके बाद उन्होंने मीडिया से चर्चा में साफ कहा कि उनकी इस सक्रियता का मकसद केवल संगठन को मजबूत करना है. उन्होंने कहा कि “जो कांग्रेसी घर में बैठे हैं, उन्हें फिर से जोड़ना ही इस दौरे का उद्देश्य है.

कार्यकर्ताओं-नेताओं से संपर्क साध रहे

राजनीतिक रूप से अजय सिंह की यह सक्रियता कई मायनों में अहम मानी जा रही है. दरअसल, उनके पिता और पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के समय के कई वरिष्ठ कांग्रेसी नेता आज भी प्रदेश में प्रभाव रखते हैं, लेकिन संगठन से दूरी बना चुके हैं. अजय सिंह उन्हीं नेताओं को फिर से सक्रिय करने की कोशिश कर रहे हैं। खास बात यह है कि वे बड़े सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूरी बनाकर सीधे कार्यकर्ताओं और नेताओं से व्यक्तिगत संपर्क साध रहे हैं.

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विंध्य से बाहर विस्तार देने की कोशिश

जिला कांग्रेस कार्यालयों में बैठकें और घर-घर जाकर मुलाकातें उनकी रणनीति का हिस्सा हैं. सियासी विश्लेषकों का मानना है कि अजय सिंह की यह कवायद 2028 विधानसभा चुनाव से पहले संगठन में नई जान फूंकने और अपने राजनीतिक दायरे को विंध्य से बाहर विस्तार देने की कोशिश है. इसे कांग्रेस के भीतर संभावित नए शक्ति संतुलन की भूमिका के तौर पर भी देखा जा रहा है.

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