देवास पटाखा फैक्ट्री में 2 महीने पहले लगी थी आग, बंद करने की जगह लाइसेंस रिन्यू कर दिया; पहले ही दी गई थी चेतावनी

रिपोर्ट में पटवारी ने साफ तौर पर बताया था कि फैक्ट्री घनी आबादी से 500 मीटर दूर और पेट्रोल पंप से महज 700 मीटर की दूरी पर होगी. लेकिन पटवारी की चेतावनी के बावजूद पटाखा फैक्ट्री का संचालन मिल गया.
Picture after the explosion in the firecracker factory in Dewas.

देवास की पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट के बाद की तस्वीर.

Dewas Factory Fire Case: मध्य प्रदेश के देवास जिल में गुरुवार सुबह पटाखा फैक्ट्री में आग लगने से हादसा हो गया. इसमें 5 लोगों की मौत हो गई, जबकि 15 से ज्यादा लोग घायल हैं. पटाखा फैक्ट्री में धमाका इतना तेज था कि मरने वाले लोगों के चीथड़े सड़क पर पड़े मिले. इस पूरी मामले में नाकाम सिस्टम का बड़ा फेलियर नजर आ रहा है. जांच में सामने आया है कि मार्च में भी पटाखा फैक्ट्री में आग लगी थी. जिसके बाद फैक्ट्री को बंद किया गया था. लेकिन मई में ही फैक्ट्री का लाइसेंस फिर रिन्यू कर दिया गया. इसके अलावा पटाखा फैक्ट्री को लेकर पटवारी की एक रिपोर्ट भी सामने आई है. जिसमें पटवारी ने फैक्ट्री को घनी आबादी के पास होने के कारण खतरनाक बताया था.

पेट्रोल पंप के सामने बारूद फैक्ट्री का संचालन

पड़ताल में जो बात सामने निकलकर आई है, वो हैरान करने वाली है. यह पहली दफा नहीं है जब एबी रोड स्थित पटाखा फैक्ट्री में आग लगी हो. हादसे में घायल मजदूरों ने बताया कि फैक्ट्री में कई बार आग लगने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं. 14 मार्च को भी पटाखा फैक्ट्री में आग लगी थी. जिसके बाद यहां काम रोक दिया गया था. इसको लेकर कलमा की सरपंच कविता गौड़ ने 16 मार्च को शिकायत भी की. सरपंच ने कहा था कि पेट्रोल पंप के सामने ही बारूद फैक्ट्री का संचालन किया जा रहा है, जो कि बेहद घातक साबित हो सकता है. लेकिन सरपंच की शिकायत प्रशासन पर बेअसर साबित हुई और मई में पटाखा फैक्ट्री का लाइसेंस फिर रिन्यू कर दिया गया.

पटवारी की रिपोर्ट के बाद भी लाइसेंस कैसे मिला?

जांच में ये भी सामने आया है कि पटाखा फैक्ट्री के शुरू होने से पहले पटवारी से जिला प्रशासन ने रिपोर्ट मांगी थी. लेकिन इस रिपोर्ट में पटवारी ने साफ तौर पर बताया था कि फैक्ट्री घनी आबादी से 500 मीटर दूर और पेट्रोल पंप से महज 700 मीटर की दूरी पर होगी. लेकिन पटवारी की चेतावनी के बावजूद पटाखा फैक्ट्री का संचालन मिल गया.

फैक्ट्री में 600 मजदूर करते हैं काम

पटाखा फैक्ट्री को सिर्फ 15 किलो का विस्फोटक लाइसेंस मिला था. लेकिन हादसे के वक्त कंपनी के अंदर कई टन बारूद मौजूद था. फैक्ट्री में लगभग 600 मजदूर काम करते हैं. नियमों की धज्जियां उड़ाकर खुलेआम जिंदगियों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा था. बताया जा रहा है कि आरोपी फैक्ट्री सचालक अनिल मालवीय बीजेपी सांसद महेंद्र सिंह सोलंकी का करीबी है.

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