HC में हिंदू पक्ष का दावा – 14वीं शताब्दी से पहले वाग्देवी मंदिर थी भोजशाला, वक्फ बोर्ड ने बताया मस्जिद

Dhar Bhojshala Case: उच्च न्यायालय में हिंदू पक्ष की ओर से कहा गया कि 14वीं शताब्दी से पहले भोजशाला मूल रूप से मां वाग्देवी का मंदिर था. कई हमलों के कारण इसके स्वरूप में बदलाव देखने को मिला, लेकिन वाग्देवी मंदिर का अस्तित्व कभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ.
indore high court

इंदौर हाई कोर्ट

Dhar Bhojshala Case: मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित भोजशाला के मालिकाना हक को लेकर एमपी हाई कोर्ट की इंदौर बेंच में सुनवाई हुई. जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की डबल बेंच के सामने हिंदू और मुस्लिम पक्ष ने दलील रखीं. इस मामले में मंगलवार (7 अप्रैल 2026) को करीब ढ़ाई घंटे तक सुनवाई हुई.

’14वीं शताब्दी से पहले वाग्देवी मंदिर था’

उच्च न्यायालय में हिंदू पक्ष की ओर से कहा गया कि 14वीं शताब्दी से पहले भोजशाला मूल रूप से मां वाग्देवी का मंदिर था. कई हमलों के कारण इसके स्वरूप में बदलाव देखने को मिला, लेकिन वाग्देवी मंदिर का अस्तित्व कभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ. इसके साथ ही वकील विष्णुशंकर जैन ने उच्चतम न्यायालय द्वारा दिए गए राम मंदिर केस फैसलों को रिकॉर्ड में लेने के लिए कहा.

‘केवल हिंदुओं को पूजा का अधिकार’

हिंदू पक्ष की ओर से अदालत में कहा गया कि परमार वंश के राजा भोज ने साल 1034 में सरस्वती मंदिर का निर्माण करवाया था. इसके साथ ही दावा किया गया कि भोजशाला परिसर में हिंदू देवी-देवता की मूर्तियां, संस्कृत श्लोकों वाले शिलालेख, मंडप और हवन कुंड मौजूद हैं. वकील विष्णुशंकर जैन ने दलील रखी कि परिसर मस्जिद नहीं है. नमाज पढ़ने से कोई जगह मस्जिद नहीं बन जाती है.

इसके साथ ही कोर्ट में दावा किया गया कि भोजशाला परिसर में केवल हिंदुओं को पूजा का अधिकार होना चाहिए. दरअसल, परिसर में ASI के एक आदेश के बाद हर मंगलवार को हिंदू पक्ष को पूजा करने की अनुमति दी गई है और हर शुक्रवार को मुस्लिम पक्ष को नमाज अदा करने की इजाजत दी गई है.

ये भी पढ़ें: Bhopal: भोपाल में कॉलेज के पास शराब दुकान को लेकर ABVP का उग्र प्रदर्शन, पुलिस से भिड़े कार्यकर्ता, रोड किया जाम

वक्फ बोर्ड का दावा- परिसर मस्जिद है

वक्फ बोर्ड ने राजस्व रिकॉर्ड में परिसर को मस्जिद होने की बात कही गई. बताया गया कि ये कमाल मौला मस्जिद है. हाई कोर्ट ने कहा कि हर एक बिंदुओं पर बारीकियों से अध्ययन किया जा रहा है. किसी भी पक्ष के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा.

ज़रूर पढ़ें