Bhopal: 41 करोड़ की संपत्ति का खुलासा, आरटीओ आरक्षक पर लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई, विधानसभा में भी गूंजा मामला
सौरभ शर्मा (फाइल फोटो)
Bhopal News: मध्य प्रदेश में परिवहन विभाग से जुड़े एक आरटीओ आरक्षक के खिलाफ लोकायुक्त की कार्रवाई ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है. मार्च 2025 में पूछे गए प्रश्न के उत्तर में 18 फरवरी 2026 को विधानसभा में दी गई जानकारी में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए.
छापेमार कार्रवाई का पूरा विवरण
कांग्रेस विधायक एवं पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में बताया गया कि 19 दिसंबर 2024 को मध्य प्रदेश लोकायुक्त संगठन की संयुक्त टीमों ने आरोपी आरटीओ आरक्षक सौरभ शर्मा के निवास और कार्यालय पर छापेमार कार्रवाई की थी. 9 सदस्यीय टीम ने घर और 7 सदस्यीय टीम ने कार्यालय की तलाशी ली.
चल संपत्ति में करोड़ों की बरामदगी
कार्रवाई के दौरान चल और अचल संपत्ति मिलाकर लगभग 41 करोड़ रुपये की संपत्ति का खुलासा हुआ. जब्त संपत्ति का विवरण इस प्रकार है. नकद, सोना-चांदी और अन्य चल संपत्तियों में 2,83,23,000 रुपये की नकद राशि बरामद की गई. स्वर्ण आभूषणों का कुल वजन 558.64 ग्राम पाया गया, जिसमें 10.80 कैरेट डायमंड भी शामिल है. इनकी अनुमानित कीमत 50,37,425 रुपये आंकी गई है. इसके अतिरिक्त 233.936 किलोग्राम चांदी बरामद हुई, जिसकी अनुमानित कीमत 2,10,50,716 रुपये बताई गई है.
वाहन और अन्य कीमती सामान
अन्य वस्तुओं और वाहनों की अनुमानित कीमत 2,54,73,481 रुपये बताई गई है. दस्तावेजों के अनुसार अचल संपत्ति की अनुमानित कीमत 30,00,00,000 रुपये है. इसके अलावा बैंक एफडी के रूप में 3,08,46,158 रुपये की राशि भी सामने आई है. इन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि आरोपी के पास आय से कई गुना अधिक संपत्ति पाई गई, जिससे गंभीर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की आशंका व्यक्त की जा रही है.
विधानसभा में लगे गंभीर आरोप
विधानसभा में इस मामले को लेकर कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह ने आरोप लगाया कि दिसंबर 2024 में जब्त की गई संपत्ति की मौजूदा बाजार कीमत अब लगभग दोगुनी हो चुकी है. उन्होंने इसे केवल अवैध संपत्ति का मामला नहीं, बल्कि सत्ता संरक्षण में पनपे संगठित भ्रष्टाचार का उदाहरण बताया. उनका आरोप है कि कुछ मंत्रियों की मिलीभगत के कारण मामले से जुड़ी जानकारी लगभग एक वर्ष तक सार्वजनिक नहीं की गई.
पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल
उन्होंने कहा कि कार्रवाई से जुड़े तथ्यों के सार्वजनिक होने में हुई देरी प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करती है. उनके अनुसार प्रदेश की जनता के टैक्स के पैसे की लूट सुनियोजित तरीके से की गई और सच्चाई छिपाने का प्रयास हुआ.
जांच और कार्रवाई की प्रमुख मांगें
इस मामले में प्रमुख मांगें भी रखी गई हैं. प्रकरण की विस्तृत और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए. संपूर्ण संपत्ति के स्रोत को सार्वजनिक किया जाए. दोष सिद्ध होने पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए. भविष्य में ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सख्त निगरानी तंत्र लागू किया जाए.
मुख्यमंत्री को लिखित शिकायत
जयवर्धन सिंह ने इस संबंध में मुख्यमंत्री को लिखित शिकायत देने की बात कही है, ताकि निष्पक्ष और समयबद्ध जांच सुनिश्चित हो सके.
जनता की नजर जांच पर
यह मामला प्रदेश में शासन व्यवस्था की विश्वसनीयता, जवाबदेही और पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है. विधानसभा में सामने आए तथ्यों के बाद अब नजर इस बात पर है कि जांच किस स्तर तक जाती है और दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है. प्रदेश की जनता भ्रष्टाचार के खिलाफ ठोस और निर्णायक कार्रवाई की अपेक्षा कर रही है.
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