MP News: नगरीय निकायों का बिजली बिल कम कराने के लिए एनर्जी ऑडिटर तैनात होंगे, सौर ऊर्जा से उत्पादन के तरीके भी बताएंगे
सांकेतिक तस्वीर.
MP News: मध्य प्रदेश के सभी नगरीय निकाय बिजली के भारी भरकम बिल के नीचे दबे हैं. इसे न चुका पाने के कारण हर महीने उनको मिलने वाली चुंगी क्षतिपूर्ति से राशि काट कर सीधे बिजली कंपनियों के खाते में जमा की जा रही है. इस समस्या से निजात दिलाने और निकायों के बिल में कमी लाने के लिए अब एनर्जी ऑडिटर्स तैनात किए जाएंगे.
165 नगरीय निकायों के लिए होगी तैनाती
फिलहाल रीवा, सागर, जबलपुर और शहडोल संभाग के 165 नगरीय निकायों के लिए विद्युत इंजीनियर्स या ऑडिटर्स की नियुक्ति की जा रही है. राज्य के निकायों में विभिन्न तरह के कनेक्शन विद्युत वितरण कंपनियों से लिए गए हैं. इनका बिल नगरीय निकाय नहीं चुका पा रहे हैं. ऐसे में इन कनेक्शन से ली जाने वाली बिजली में कमी लाने और सोलर से विद्युत उत्पादन पर नगरीय प्रशासन के अफसर फोकस कर रहे हैं. कुछ निकायों में गैर पारंपरिक स्त्रोतों से बिजली का उत्पादन किया जा रहा है. यह सफल रहा है. इसके मद्देनजर संचालनालय के स्तर पर फैसला लिया गया. प्रोजेक्ट डेवलपमेंट एंड मैनेजमेंट कंसलटेंट के स्तर पर विद्युत इंजीनियर नियुक्त कर ऊर्जा संरक्षण का कार्य किया जाएगा. वह एलटी एचटी विद्युत कनेक्शनों का परीक्षण और पावर फैक्टर का विश्लेषण भी करेंगे. पावर फैक्टर में सुधार करा निकायों के बिजली के बिल में कमी लाएंगे. साथ में सौर ऊर्जा और गैर पारंपरिक स्त्रोत के क्षेत्र में केंद्र सरकार की योजनाओं का निकायों में अमल कराएंगे। इससे होने वाले उत्पादन से भी बिजली के खर्च में कमी आएगी और कार्बन फुट प्रिंट भी कम होगा.
हर महीने 60-70 करोड़ की कटौती
पांच साल से अधिक समय से नगरीय निकायों को मिलने वाली चुंगी क्षतिपूर्ति की राशि में कटौती की जा रही है. यह हर महीने 50-60 करोड़ रुपये होती है. भोपाल, इंदौर जैसे बड़े नगर निगम भी इसमें शामिल हैं. इन दोनों शहरों का ही मिलाकर 25 से 30 करोड़ रुपए काट कर बिजली कंपनियों के खाते में डाला जा रहा है. इसका नुकसान यह हो रहा है कि नगरीय निकायों में अधिकारियों- कर्मचारियों के वेतन, भत्ते बांटने में दिक्कत हो रही है.
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