MP News: भोपाल-ग्वालियर के बीच बनेगा नया ग्रीनफील्‍ड हाईवे, 80 किमी तक की दूरी होगी कम, इस महीने जारी होंगे DPR के टेंडर

MP News: राज्य सरकार भोपाल और ग्वालियर के बीच नया 4-लेन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर विकसित करने की तैयारी कर रही है.
Corridor (File photo)

कॉरिडोर (फाइल फोटो)

MP News: मध्य प्रदेश में सड़क संपर्क को और बेहतर बनाने की दिशा में एक और बड़ी परियोजना पर काम शुरू होने जा रहा है. राज्य सरकार भोपाल और ग्वालियर के बीच नया 4-लेन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर विकसित करने की तैयारी कर रही है. इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार कराने हेतु जून महीने में टेंडर जारी किए जाने की संभावना है.

दूरी और यात्रा समय के में होगी कमी

प्रस्तावित कॉरिडोर के निर्माण के बाद भोपाल और ग्वालियर के बीच की मौजूदा लगभग 425 किलोमीटर की दूरी घटकर करीब 340 से 350 किलोमीटर रह जाएगी. इससे यात्रियों को न केवल कम दूरी तय करनी पड़ेगी, बल्कि यात्रा का समय भी उल्लेखनीय रूप से घट जाएगा. वर्तमान में दोनों शहरों के बीच सड़क मार्ग से सफर पूरा करने में करीब 7 से 8 घंटे लगते हैं, जबकि नए हाईवे के बनने के बाद यह दूरी लगभग साढ़े पांच घंटे में तय की जा सकेगी.

दूरी और यात्रा समय में होगी कमी

प्रस्तावित कॉरिडोर के निर्माण के बाद भोपाल और ग्वालियर के बीच की मौजूदा लगभग 425 किलोमीटर की दूरी घटकर करीब 340 से 350 किलोमीटर रह जाएगी. इससे यात्रियों को न केवल कम दूरी तय करनी पड़ेगी, बल्कि यात्रा का समय भी उल्लेखनीय रूप से घट जाएगा. वर्तमान में दोनों शहरों के बीच सड़क मार्ग से सफर पूरा करने में करीब 7 से 8 घंटे लगते हैं, जबकि नए हाईवे के बनने के बाद यह दूरी लगभग साढ़े पांच घंटे में तय की जा सकेगी.

तीन साल में पूरा करने का लक्ष्य

मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम (MPRDC) इस परियोजना को बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर (BOT) मॉडल के तहत विकसित करने की योजना बना रहा है. निगम का लक्ष्य अगले तीन वर्षों के भीतर इस सड़क परियोजना को पूरा करना है. बताया जा रहा है कि महाराष्ट्र में विकसित आधुनिक सड़क नेटवर्क और ग्रीनफील्ड परियोजनाओं के अध्ययन के बाद राज्य में इस कॉरिडोर को मंजूरी देने पर सहमति बनी है.

प्रदेश में कई ग्रीनफील्ड परियोजनाओं पर काम जारी

प्रदेश में इससे पहले भी कई ग्रीनफील्ड कॉरिडोर परियोजनाओं पर काम चल रहा है. इनमें भोपाल-मंदसौर, सागर-सतना, सागर-जबलपुर और जबलपुर-आशापुर मार्ग प्रमुख हैं, जिनकी डीपीआर तैयार की जा रही है या परियोजनाएं आगे बढ़ चुकी हैं. एमपीआरडीसी के प्रबंध संचालक भरत यादव के अनुसार, राज्य में बढ़ते यातायात दबाव को देखते हुए ऐसे मार्गों को प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि यात्रा का समय घटे और परिवहन व्यवस्था अधिक सुगम एवं किफायती बन सके.

अन्य कॉरिडोर परियोजनाओं की स्थिति

वर्तमान में भोपाल-मंदसौर ग्रीनफील्ड कॉरिडोर की लंबाई 256 किलोमीटर प्रस्तावित है, जिस पर करीब 11,550 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है. वहीं सागर-सतना कॉरिडोर 218.20 किलोमीटर लंबा होगा और इसकी अनुमानित लागत 9,850 करोड़ रुपए बताई गई है. जबलपुर-आशापुर कॉरिडोर की लंबाई लगभग 256 किलोमीटर होगी, जिस पर 17,056 करोड़ रुपए खर्च होने की संभावना है.

क्या है बीओटी मॉडल?

बीओटी मॉडल के तहत सड़क निर्माण में कुल लागत का 20 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार और 20 प्रतिशत राज्य सरकार वहन करती है, जबकि शेष 60 प्रतिशत राशि निर्माण एजेंसी द्वारा निवेश की जाती है. इसके बदले एजेंसी को निर्धारित अवधि तक टोल वसूली का अधिकार दिया जाता है. एमपीआरडीसी भविष्य में भी अधिक यातायात वाले सड़क प्रोजेक्ट्स को इसी मॉडल पर विकसित करने की रणनीति पर काम कर रहा है.

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