दतिया उपचुनाव के नतीजों पर ज्योतिष का बड़ा दावा, इस नेता की कुंडली में लिखा है ‘राजयोग’, जानिए क्या कहते है सितारे
दतिया उपचुनाव 2026
दतिया उपचुनाव को लेकर जहां राजनीतिक दल अपनी-अपनी जीत के दावे कर रहे हैं, वहीं अब ज्योतिषीय आकलन भी चर्चा में है. ग्रहों और राशियों के आधार पर किए गए ज्योतिश आकलन के आधार पर किसके सिर दतिया का ताज सज रहा है आइए जानते हैं.
बिजेपी के आषुतोष तिवारी ग्रहों दशा व और उनकी राशि मीन है क्योंकि मेष राशि का लग्न गुरु की दहिया में है इसलिए किनारे पर आते आते मीन राशि के चलते जीत हासिल करेंगे.
कॉग्रेस के घनश्याम सिंह की धनु राशि के अनुसार चुनाव में अपना दमखम दिखाया है. उनकी राशि धनु लग्न में साफ तौर पर दिखाई दे रहा है कि अन्य के कारण उनके राजनीति में बाधा उत्पन्न होगी. अगर अन्य का हस्तक्षेप बन्द हो तो उनका हर तरफ से जीवन भविष्य फल उज्ज्वल है. जिस प्रकार उन्होंने लड़ा है उसमें अन्य के खातिर कई बार दिक्कत का सामना करना पड़ा है. ये राशि बता रही है कि लेकिन वो बड़ी टक्कर देने के बाद भी जीत हासिल नहीं कर सकेंगे.
राजनीति दृष्टि से कमजोर
वहीं दामोदर की यादव मीन राशि है. मीन राशि वालों का समय राजनीति दृष्टि से कमजोर है और तो और मीन राशि लग्न पर शनि देव का कुछ समय पहले अनजाने में अपमान किया है, इसलिए वो काम करते है, उनके काम बिगड़ने लगते है. इससे उनको मान सम्मान व पैसे का भी कुछ समय से नुकसान उठाना पड़ सकता है. वो दूसरो के लिए बनते काम को बिगाड़ सकते है. जो इस उप चुनाव में दिखाई दे रहा है.
भाजपा प्रत्याशी के जीत की संभावना
एक विश्लेषण में बीजेपी प्रत्याशी की जीत की संभावना जताई गई है. हालांकि यह विश्लेषण पूरी तरह ज्योतिषीय पण्डित मनीष शर्मा के अनुसार बीजेपी के आशुतोष तिवारी जीत हासिल होगी लेकिन बहुत कम अंतर से. दतिया उपचुनाव में बीजेपी प्रत्याशी आशुतोष तिवारी, जिनकी राशि मेष बताई जा रही है, उनके पक्ष में ग्रहों की स्थिति अनुकूल होने का दावा किया गया है. ज्योतिषीय विश्लेषण के अनुसार वे कम अंतर से जीत दर्ज कर सकते हैं.
वहीं कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह, जिनकी उपलब्ध जन्मतिथि के आधार पर राशि धनु मानी गई है, उनके लिए चुनाव में कड़ी मेहनत के बावजूद सफलता अंतिम पड़ाव पर आकर छूटने की संभावना जताई गई है.
आजाद समाज पार्टी के प्रत्याशी हाल
उधर आजाद समाज पार्टी के प्रत्याशी दामोदर यादव, जिनकी राशि मीन बताई गई है, उनके चुनाव मैदान में रहने से मुकाबला त्रिकोणीय होने की बात कही गई है. विश्लेषण के अनुसार यदि तीसरा उम्मीदवार मैदान में नहीं होता, तो कांग्रेस की जीत की संभावना अधिक मजबूत हो सकती थी.
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