Datia By-election: कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने नामांकन दाखिल किया, उमंग सिंघार समेत कई नेता रहे मौजूद
दतिया उपचुनाव: कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने नामांकन दाखिल किया
Datia By-election: दतिया उपचुनाव के लिए कांग्रेस उम्मीदवार घमश्याम सिंह ने सोमवार (13 जुलाई 2026) को नामांकन दाखिल कर दिया. इस दौरान मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, पीसीसी चीफ जीतू पटवारी, भांडेर विधायक फूल सिंह बरैया समेत कई कांग्रेसी नेता मौजूद रहे. नामांकन दाखिल करने से पहले कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने पीतांबरा पीठ पहुंचकर मां बगलामुखी के दर्शन किए और विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त किया.
इसके बाद उन्होंने प्राचीन बनखंडेश्वर महादेव मंदिर पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक एवं पूजा-अर्चना की तथा चुनाव में सफलता की कामना की. धार्मिक अनुष्ठान के बाद कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह समर्थकों के साथ सीधे नवीन कलेक्ट्रेट के लिए रवाना हुए, जहां उन्होंने नामांकन पत्र दाखिल किया.
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— Vistaar News (@VistaarNews) July 13, 2026
कांग्रेस करेगी शक्ति प्रदर्शन
नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद कांग्रेस की ओर से बाईपास रिंग रोड स्थित सभा स्थल पर एक विशाल आमसभा आयोजित की जाएगी. प्रदेश के वरिष्ठ कांग्रेस नेता आमसभा को संबोधित करेंगे. उपचुनाव के मद्देनजर कांग्रेस ने नामांकन दिवस को शक्ति प्रदर्शन के रूप में आयोजित किया है.
आज नामांकन का आखिरी दिन
चुनाव आयोग ने 6 जुलाई को दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव की अधिसूचना जारी की थी. नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख (13 जुलाई) के दिन कांग्रेस उम्मीदवार ने पर्चा दाखिल किया. पत्रों की जांच 14 जुलाई को होगी. इसके बाद नोमिनेशन फॉर्म वापस लेने की आखिरी तारीख 16 जुलाई है. चुनाव 30 जुलाई को आयोजित किए जाएंगे. इसके बाद मतों की गिनती 3 अगस्त 2026 को होगी.
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दतिया सीट पर क्यों रहा उपचुनाव?
दतिया विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक रहे राजेंद्र भारती को दिल्ली की राउज एवेन्यू स्थित MP-MLA कोर्ट ने कॉपरेटिव बैंक घोटाले में दोषी पाया था. इसके बाद उन्हें तीन साल की सजा सुनाई गई थी. इस सजा के बाद उनकी विधायकी रद्द हो गई थी और सीट रिक्त घोषित कर दिया गया था. अदालत के इस फैसले के बाद चुनाव आयोग ने उपचुनाव की घोषणा की. भारती ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. यहां से भी उन्हें निराशा हाथ लगी थी. उच्च न्यायालय ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा था.