टिकट कटने के बाद नरोत्तम मिश्रा की अमित शाह से क्या हुई थी बात?

ग्वालियर में आयोजित विस्तार ने न्यूज के खास कार्यक्रम 'ग्वालियर गौरव विस्तार सम्मान' में नरोत्तम मिश्रा ने दतिया उपचुनाव में मिली हार पर खुलकर बात रखी.
narottam mishra

भाजपा नेता नरोत्तम मिश्रा

Narottam Mishra On Vistaar News: ग्वालियर में आयोजित विस्तार न्यूज के खास कार्यक्रम ‘ग्वालियर गौरव विस्तार सम्मान’ में भाजपा नेता और राज्य के पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा पहुंचे. उन्होंने दो लाइन ‘जिसकी मस्ती जिंदा है उसकी हस्ती जिंदा है’ के साथ इंटरव्यू की शुरुआत की. इस बातचीत के दौरान नरोत्तम मिश्रा ने प्रदेश की राजनीति से लेकर व्यक्तिगत राजनीतिक गतिविधियों के बारे में खुलकर बात की. उन्होंने दतिया उपचुनाव में भाजपा को मिली हार पर भी बेबाकी से अपनी बात रखी.

गृहमंत्री अमित शाह से क्या बात होती है?

विस्तार न्यूज के एडिटर इन चीफ ज्ञानेंद्र तिवारी ने जब नरोत्तम मिश्रा से पूछा कि आप जब गृहमंत्री अमित शाह से मिलते हैं तो क्या बात होती है? क्या आपको भविष्य में कोई बड़ी जिम्मेदारी मिलने वाली है? क्या आपकी दतिया में टिकट कटने के बाद कोई इस विषय में बातचीत हुई? इसके जवाब में नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि मेरी गृहमंत्री अमित शाह से कोई भी शिकायती लहजे में बात नहीं हुई है.

अब मुझे कोई पद की लालसा नहीं – नरोत्तम मिश्रा

उन्होंने कहा कि अब मुझे कोई पद की लालसा नहीं है. बहुत हो गया, 6 बार विधायक, 5 बार मंत्री, बस अब मुझे पार्टी का काम चाहिए. पार्टी मुझे काम देते है रहे फिर चाहे वह दिल्ली चुनाव का हो, मध्य प्रदेश चुनाव का हो या फिर बिहार चुनाव का हो. पार्टी से जो भी काम मिलेगा वह मैं पूरी जिम्मेदारी से निभाऊंगा.

भाजपा में बिखराव के आरोप पर क्या बोले नरोत्तम मिश्रा

कांग्रेस द्वारा मध्य प्रदेश बीजेपी में बिखराव के आरोप वाले सवाल पर नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि मध्य प्रदेश भाजपा में कोई बिखराव है ही नहीं. सरकार से सभी बीजेपी के लीडर खुश है और तालमेल भी बढ़िया है. विस्तार न्यूज के एडिटर इन चीफ ज्ञानेंद्र तिवारी ने जब पूछा कि क्या आप नाराज नहीं हैं, तो उन्होंने कहा कि मेरी नाराजगी का कोई सवाल ही नहीं उठाता.

कमलनाथ सरकार गिराने को लेकर कहा कि सरकार मैंने नहीं गिराई, अपने वजन से गिर गई. कमलनाथ की नाकामी से गिर गई. कांग्रेस के अंदर भाजपा का क्या रोल. कांग्रेस के नेता टूटे, विधायक टूटे, उसमें भाजपा का क्या रोल? कमलनाथ ने 2 लाख रुपए तक कर्जा माफ करने की बात कही थी, लेकिन 2 महीने बीत जाने के बाद भी 20,000 रुपए तक कर्जा माफ नहीं किया. रोजगार के नाम पर जीरो रहे. नौजवानों को ढोल बजाने और ढोर चराने की बात कही.

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