श्योपुर में स्कूली बच्चों की जिंदगी से खिलवाड़; क्षमता 10 सीट की, वैन में 26 बच्चे ठूंस-ठूंसकर भर दिए
श्योपुर 10 सीटर वैन में 25 स्कूली बच्चों को बिठाकर ले जाया गया.
Input- हेमकुमार तिवारी
MP News: शिक्षा का मंदिर कहे जाने वाले स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन श्योपुर जिले के विजयपुर में इन दावों की हकीकत कुछ और ही नजर आ रही है. यहां निजी स्कूल संचालकों द्वारा मासूम बच्चों की जिंदगी को खुलेआम खतरे में डाला जा रहा है. जिन वाहनों में नियमानुसार केवल 9 से 10 बच्चों को बैठाने की अनुमति है, उन्हीं वाहनों में 25 से 26 बच्चों को भेड़-बकरियों की तरह ठूंस-ठूंसकर स्कूल लाया और छोड़ा जा रहा है. यह केवल नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि मासूमों की जान के साथ खुला खिलवाड़ है.
वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ
शुक्रवार को विजयपुर क्षेत्र में संचालित GVN एकेडमी के एक निजी स्कूल वाहन का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ. वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि एक छोटी वैन से एक-एक कर बच्चों को बाहर निकाला जा रहा है. जब गिनती की गई तो वाहन से 25 बच्चे निकले. यदि चालक को भी शामिल किया जाए तो वाहन में कुल 26 लोग सवार थे. जबकि यह वाहन केवल 10 लोगों की क्षमता वाला बताया जा रहा है.
हादसों को दावत दे रही वैन
वीडियो में यह भी देखा गया कि कई बच्चे एक-दूसरे की गोद में बैठकर यात्रा कर रहे थे. कई बच्चों के बैठने तक की पर्याप्त जगह नहीं थी. यदि रास्ते में अचानक ब्रेक लग जाए, वाहन पलट जाए या किसी अन्य वाहन से टक्कर हो जाए तो बड़ी जनहानि से इनकार नहीं किया जा सकता. इसके बावजूद स्कूल संचालक बच्चों की सुरक्षा से ज्यादा अपनी कमाई को प्राथमिकता देते नजर आ रहे हैं.
हर दिन दौड़ रहे ‘मौत के वाहन‘
जून से नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो चुका है और रोजाना सैकड़ों बच्चे इन्हीं वाहनों में स्कूल आ-जा रहे हैं. लेकिन परिवहन विभाग और शिक्षा विभाग की ओर से अब तक कोई प्रभावी जांच या कार्रवाई सामने नहीं आई है. नियम स्पष्ट हैं कि स्कूल वाहनों में निर्धारित क्षमता से अधिक बच्चों को नहीं बैठाया जा सकता, फिर भी इन नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं.
अभिभावक ने बनाया वीडियो, तब खुली पोल
बताया जा रहा है कि जब स्कूल वाहन बच्चों को छोड़ने पहुंचा तो एक अभिभावक को वाहन में असामान्य भीड़ दिखाई दी. उन्होंने मौके पर ही वीडियो बनाना शुरू किया. जैसे-जैसे बच्चे वाहन से उतरते गए, लोगों की हैरानी बढ़ती गई. देखते ही देखते 25 बच्चे वाहन से बाहर निकल आए. वीडियो वायरल होने के बाद क्षेत्र में स्कूल प्रबंधन की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठने लगे हैं.
क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार है?
स्थानीय लोगों का कहना है कि विजयपुर में यह कोई पहली घटना नहीं है. कई निजी स्कूलों के वाहन रोजाना क्षमता से कहीं अधिक बच्चों को भरकर सड़कों पर दौड़ते देखे जा सकते हैं. जिम्मेदार विभाग सब कुछ जानते हुए भी आंखें मूंदे बैठा है. सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे के बाद ही जागेगा?
परिवहन और शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
इस घटना के बाद जिला परिवहन विभाग और शिक्षा विभाग दोनों की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है. यदि समय-समय पर स्कूल वाहनों की जांच होती, फिटनेस, परमिट और क्षमता की निगरानी की जाती तो शायद ऐसी स्थिति पैदा ही नहीं होती. लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की निष्क्रियता के कारण निजी स्कूल संचालकों के हौसले बुलंद हैं.
विधायक प्रतिनिधि सिराज दाउदी ने उठाए सवाल
विधायक प्रतिनिधि सिराज दाउदी ने कहा कि जिले में निजी स्कूल संचालक बच्चों की जान के साथ लगातार खिलवाड़ कर रहे हैं. इस संबंध में कई बार परिवहन विभाग और जिला प्रशासन को शिकायतें दी गईं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. उन्होंने मांग की कि जिला शिक्षा अधिकारी और परिवहन विभाग संयुक्त रूप से अभियान चलाकर सभी स्कूल वाहनों की जांच करें तथा क्षमता से अधिक बच्चों को ले जाने वाले स्कूलों पर कड़ी कार्रवाई की जाए.
मासूमों की सुरक्षा सबसे पहले
स्कूल केवल शिक्षा देने की जगह नहीं, बल्कि बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी निभाते हैं. यदि स्कूल प्रबंधन ही सुरक्षा नियमों की अनदेखी करेगा तो अभिभावक अपने बच्चों को सुरक्षित कैसे महसूस करेंगे? जरूरत है कि प्रशासन तत्काल कार्रवाई करे, ओवरलोड स्कूल वाहनों पर रोक लगाए और दोषी स्कूल संचालकों के खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाए, ताकि भविष्य में किसी मासूम की जान जोखिम में न पड़े.
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