मुरैना में 8 गांवों में पानी के लिए हाहाकार! बिजली विभाग की लापरवाही से गहराया जल संकट
मुरैना में ग्रमीणों पानी लेने के लिए ट्रैक्टर लेकर 8 किलोमीटर दूर तक जा रहे हैं.
Input- मनोज शर्मा
मुरैना में तेज आंधी-तूफान के बाद टूटे बिजली तारों की मरम्मत न होने से सबलगढ़ जनपद की ग्राम पंचायत बनवारा और नोरावली के करीब 8 से 10 गांवों में गंभीर जल संकट खड़ा हो गया है. पिछले आठ दिनों से 5000 से अधिक ग्रामीण पीने के पानी के लिए दर-दर भटक रहे हैं, जबकि महिलाओं और बच्चों का आधा दिन केवल पानी ढोने में ही गुजर रहा है.
पानी के लिए 8 किलोमीटर दूर जाना पड़ रहा
ग्रामीणों के अनुसार बिजली आपूर्ति ठप होने से निजी बोरवेल बंद पड़े हैं. जिससे बनवारा, पालरी, बंडा का पुरा, मूलचंद का पुरा, गाजीखेड़ा, पांचोली का पुरा, हवसें का पुरा, बबुआ का पुरा, नीमनी का पुरा और समां का पुरा सहित कई गांवों में पेयजल संकट गहरा गया है. पानी के लिए लोगों को 7 से 8 किलोमीटर दूर बत्तोखर और पिपरघान गांव तक ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर जाना पड़ रहा है.
ग्रामीणों ने बताया कि शुक्रवार को बत्तोखर में भी बिजली नहीं होने के कारण चार ट्रैक्टर पानी भरने के लिए तीन घंटे तक खड़े रहे. इससे लोगों का पूरा दिन केवल पानी जुटाने में निकल गया. ग्रामीणों का आरोप है कि जल जीवन मिशन के तहत लाखों रुपये खर्च कर बनाई गई पानी की टंकियां और बिछाई गई पाइपलाइनें आज भी शोपीस बनी हुई हैं. एक से दो साल पहले घर-घर नल कनेक्शन दिए गए, लेकिन आज तक एक बूंद पानी नहीं मिला.
ना टूटे तार जोड़े गए, ना ही बिजली बहाल की गई
गांव वालों ने बिजली विभाग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि शिकायतों के बावजूद न तो टूटे तार जोड़े गए और न ही बिजली बहाल की गई. यहां तक कि ग्रामीणों से खंभों के लिए गड्ढे खुदवाने और खंभे लगवाने के बाद भी लाइन चालू नहीं की गई. जिला पंचायत सीईओ ललित कुमार चौधरी ने माना कि मामला जनकल्याण शिविर में भी उठा था और बिजली विभाग को तत्काल लाइन जोड़ने के निर्देश दिए गए थे. उन्होंने कहा कि सरपंच और सचिव को टैंकरों से पानी की व्यवस्था करनी चाहिए थी, ऐसा न करना गंभीर लापरवाही है. संबंधितों को नोटिस जारी कर कार्रवाई की जाएगी.
ग्रामीण अजय सिंह, बत्ती देवी और विनोद केवट का कहना है कि 20 से अधिक लोग बिजलीघर जाकर शिकायत कर चुके हैं, लेकिन अब तक बिजली बहाल नहीं हुई. गर्मी के बीच इंसानों के साथ-साथ पशुओं के सामने भी पानी का संकट खड़ा हो गया है.
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