MP News: जबलपुर में खास तरीके से मनाई जाती है होली, होलिका की प्रतिमाएं रहती हैं आकर्षण का केंद्र
जबलपुर में होलिका की प्रतिमाएंआकर्षण का केंद्र बनीं.
MP News: पूरे देश में रंगों का त्यौहार बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है. लेकिन रंग गुलाल उड़ाने से पहले लोग भारतीय परंपरा के मुताबिक होलिका दहन भी करते हैं. पहले होलिका का दहन लकड़ियों, गोबर के कंडों को मिलाकर किया जाता था, लेकिन समय के साथ-साथ अब होलिका दहन का स्वरूप भी बदलता जा रहा है. पहले प्रतीकात्मक तौर पर लकड़ियां जलाई जाती थीं, लेकिन अब उन लकड़ियों के ऊपर होलिका की प्रतिमा भी रखी जाने लगी है. यह प्रतिमाएं भी कम आकर्षण का केंद्र नहीं है.
1500 से ज्यादा जगहों पर होलिका दहन
संस्कारधानी जबलपुर में होलिका की प्रतिमा रखने की अलग परंपरा पिछले कई वर्षों से चली आ रही है. जबलपुर के मूर्तिकारों द्वारा बनाई जाने वाली प्रतिमाओं की मांग पूरे महाकौशल क्षेत्र में होती है. आसपास के जिलों से लेकर दूर-दूर के जिलों तक जबलपुर की होलिका की प्रतिमा का चलन बढ़ता ही जा रहा है. जबलपुर शहर में तकरीबन 1500 से ज्यादा जगह पर होलिका का दहन किया जाता है.
होलिका की प्रतिमाएं बनीं आकर्षण का केंद्र
जबलपुर शहर के मुख्य चौक चौराहा पर इस बार होलिका की प्रतिमा सबको आकर्षित कर रही हैं. कहीं प्रतिमाएं इतनी सुंदर हैं कि लोग देखते ही ठहर जाते हैं, तो कहीं प्रतिमाएं इतनी ज्यादा डरावनी नजर आ रही हैं कि बच्चे तो एक नजर देख कर डर ही जाते हैं. जबलपुर में अलग-अलग होलिका की प्रतिमाओं को देखकर लोगों में गजब का उत्साह नजर आ रहा है.
जबलपुर के राइट टाउन इलाके में रखी गई होलिका की प्रतिमा को देखकर लोग सहम जाते हैं. मानस भवन चौराहे पर रखी गई होलिका की प्रतिमा एक डरावनी चुड़ैल के रूप में नजर आ रही है. जिसके पोस्टर पर लिखा है कि वह 20 साल बाद लौटी है. इसे जो भी देखता है अपने कमरे में कैद कर रहा है. इसी तरह गोरखपुर क्षेत्र में 21 फीट ऊंची होलिका की डरावनी प्रतिमा रखी गई है, जो सबको आकर्षित कर रही है. इसी तरह नेपियर टाउन इलाके में भी होलिका की सुंदर प्रतिमा को स्थापित किया गया है. सिविल लाइन क्षेत्र में होलिका की प्रतिमा किसी हीरोइन से कम नजर नहीं आ रही है. सदर इलाके में रखी गई एक होलिका की प्रतिमा तो महारानी के स्वरूप में स्थापित की गई है. कहीं होलिका की प्रतिमा पर आंखों में चश्मा और हाथों में पर्स नजर आता है, तो कहीं मछली के रूप में होलिका की प्रतिमा स्थापित की गई है. साल दर साल होलिका दहन का स्वरूप बदलता जा रहा है. अब लोग लकड़ी और गोबर के कंडों के साथ होलिका की प्रतिमा पर भी जमकर खर्च कर रहे हैं.