MP News: मध्य प्रदेश में 80 हजार आबादी पर एक एंबुलेंस, 998 गाड़ियां कर रही पूरे प्रदेश को कवर
एंबुलेंस(फाइल फोटो
MP News: मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं. सरकारी एंबुलेंस सेवाओं की स्थिति यह है कि प्रदेश में औसतन 80 हजार की आबादी पर एक एंबुलेंस उपलब्ध है. बीते चार से पांच वर्षों में एंबुलेंस संचालन के लिए निजी कंपनियों को करीब 878 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है. अनुमान है कि मरीजों को एंबुलेंस सुविधा उपलब्ध कराने पर सरकार प्रतिदिन लगभग 12 करोड़ रुपये खर्च कर रही है.
प्रदेश में एंबुलेंस सेवाएं मुख्य रूप से नेशनल हेल्थ मिशन के तहत संचालित की जा रही हैं, जिनमें डायल 108 सेवा भी शामिल है. स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने बताया कि भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार प्रति 5 लाख आबादी पर एक एडवांस लाइफ सपोर्ट (ALS) और एक बेसिक लाइफ सपोर्ट (BLS) एंबुलेंस का प्रावधान है. उनका कहना है कि प्रदेश में एंबुलेंस सेवाएं जनसंख्या अनुपात के अनुरूप संचालित की जा रही हैं.
998 एंबुलेंस से कवर हो रहा पूरा प्रदेश
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश के 51 जिलों में करीब 8 करोड़ 35 लाख की आबादी के लिए 163 एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस और 835 बेसिक लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस संचालित हो रही हैं. यानी कुल मिलाकर 998 एंबुलेंस के जरिए पूरे प्रदेश को कवर किया जा रहा है. इस आधार पर औसतन लगभग 80 से 85 हजार लोगों पर एक एंबुलेंस की उपलब्धता बनती है.
जमीनी स्तर पर नहीं उपलब्ध हो पाती एंबुलेंस
मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रति एंबुलेंस सेवा पर राज्य सरकार का औसत खर्च करीब 14 लाख रुपये है. हालांकि विपक्ष इस आंकड़े को लेकर सवाल उठा रहा है कि जब केंद्र के मानक के अनुसार प्रति 5 लाख आबादी पर दो एंबुलेंस पर्याप्त मानी गई हैं, तो जमीनी स्तर पर ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों में समय पर एंबुलेंस क्यों नहीं पहुंच पाती.
सैकड़ों किलोमीटर दौड़ रही एक एंबुलेंस
स्वास्थ्य सेवाओं की मौजूदा स्थिति को देखते हुए विशेषज्ञों का कहना है कि केवल संख्या के आधार पर व्यवस्था को पर्याप्त नहीं कहा जा सकता. प्रदेश के भौगोलिक विस्तार, आदिवासी और दुर्गम क्षेत्रों, खराब सड़क नेटवर्क और बढ़ती जनसंख्या को देखते हुए एंबुलेंस की वास्तविक जरूरत कहीं अधिक है. कई जिलों में एक एंबुलेंस को प्रतिदिन सैकड़ों किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है, जिससे प्रतिक्रिया समय प्रभावित होता है.
स्वास्थ्य सुविधा में सुधार की आवश्यकता
सरकार का दावा है कि एंबुलेंस सेवाओं का संचालन तय मानकों के अनुरूप है, लेकिन 878 करोड़ रुपये के भुगतान और रोजाना 12 करोड़ के खर्च के बावजूद यदि मरीजों को समय पर सुविधा नहीं मिल रही है, तो यह सवाल उठना लाजिमी है कि व्यवस्था में खामी कहां है. स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच यह मुद्दा आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस का बड़ा विषय बन सकता है. फिलहाल आंकड़े यह संकेत दे रहे हैं कि प्रदेश की स्वास्थ्य सुविधाएं दबाव में हैं और जमीनी सुधार की आवश्यकता है.
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