MP News: एमपी में निकायों में अमृत योजना का काम कछुआ चाल, पानी और सीवेज लाइन नेटवर्क तैयार करने में निकायों के 60 प्रतिशत काम अधूरे

MP News: अमृत 2.0 मिशन परियोजना के तहत 2026 तक कार्य पूरा करना है, लेकिन हालत यह है कि दो वर्ष बाद भी काम 60 फीसदी विशेष तक अधूरे हैं.
Amrit 2.0 Mission Project

अमृत 2.0 मिशन परियोजना

MP News: मध्‍य प्रदेश के सभी 413 निकायों में सीवेज और पानी के बेहतर नेटवर्क तैयार करने के लिए अमृत 2.0 मिशन परियोजना वर्ष 2023 में शुरू की गई थी. निकायों को यह परियोजना 2026 तक पूरा करना है, लेकिन हालत यह है कि दो वर्ष बाद भी काम 60 फीसदी विशेष तक अधूरे हैं. इसी तरह कछुआ चाल रही तो काम पूरा होने में और दो वर्ष यानि 2028 तक का समय लगने की संभावना है. ये परियोजनाएं 12 हजार करोड़ रुपए से अधिक की हैं.

गलत डीपीआर के चलते परियोजनाएं पिछड़ रही

नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने दो दिन पहले सभी निकायों के अधिकारियों, ठेकेदारों और सलाहकारों से पिछड़ रही परियोजना के संबंध में चर्चा की थी. यह निकलकर आया कि गलत डीपीआर के कारण कई परियोजनाएं पिछड़ रही हैं. कई जगह ठेकेदार काम लेने के बाद इसे करने में आगे-पीछे कर रहे हैं. ड्राइंग-डिजाइन अनुमोदन में अनावश्यक विलंब करने वाले अधिकारियों एवं पीडीएमसी टीम की जवाबदेही तय करने के निर्देश भी दिए गए.

काम करने में मंडला जिला सबसे आगे

परियोजना में काम करने के मामले में मंडला जिले का नगर निकाय सबसे आगे हैं. इन निकायों में 60 फीसदी काम पूरा हुआ है. रैंकिंग के मामले में यह जिला सबसे ऊपर है. इसके बाद विदिशा में सीवेज का काम सिर्फ 6% हो पाया है. कंपनी ने सीवेज लाइन डालने के लिए जगह-जगह खुदाई कर दी लेकिन काम काफी धीमी गति से चल रहा है. बालाघाट, टीकमगढ़, नर्मदापुरम और आगर मालवा जिला हैं. वहीं बुरहानपुर, मुरैना, दतिया, ग्वालियर और सिवनी जिले की नगर पालिकाएं व नगर परिषद काफी पीछे हैं.

धीमी रफ्तार के बाद विभाग ने दिए निर्देश

खराब प्रगति और धीमी गति से काम करने निकायों, ठेकेदारों, ड्राइंग डिजाइन तैयार करने वालों के विरुद्ध सस्पेंशन, जुर्माना लगाने एवं ब्लैकलिस्टेड जैसी कार्यवाही की जा रही हैं. ड्राइंग-डिजाइन अनुमोदन में अनावश्यक विलंब करने वाले अधिकारियों एवं पीडीएमसी टीम की जवाबदेही तय करने के निर्देश हैं. डीपीआर तैयार करने वाले सलाहकारों की समीक्षा कर दोषी पाए जाने पर उन्हें ब्लैकलिस्ट किया जाएगा. ड्राइंग डिजाइन और ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कहा गया है.

ऑनलाइन मॉनिटरिंग से अफसर की तय होगी जवाबदेही-एसीएस

नगरी प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे का कहना है कि अमृत परियोजना का काम कई निकायों में काफी पीछे चल रहा है, इसके लिए इंजीनियरों और ठेकेदारों को समय सीमा में पूरा करने के लिए कहा गया है. इसकी समीक्षा हर माह की जाएगी. जो समय सीमा में काम नहीं करेंगे उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. परियोजनाओं की ऑनलाइन मॉनिटरिंग, प्रगति की डिजिटल रिपोर्टिंग और पोर्टल आधारित समीक्षा से जवाबदेही सुनिश्चित होगी तथा किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी.

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