MP News: तबादले के 6 माह बाद खाली नहीं किया सरकारी आवास तो देना होगा 90 हजार तक जुर्माना, गृह विभाग का आदेश

MP News: नए नियमों के तहत चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी से लेकर वरिष्ठ अधिकारियों तक सभी पर यह प्रावधान समान रूप से लागू होगा.
Vallabh Bhavan Bhopal

वल्‍लभ भवन भोपाल

MP News: राजधानी भोपाल से तबादला होने के बाद अब अधिकारी-कर्मचारी लंबे समय तक शासकीय आवास पर कब्जा नहीं रख सकेंगे. गृह विभाग ने शासकीय आवास नियमों में संशोधन करते हुए सख्त आदेश जारी किए हैं. नए नियमों के तहत चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी से लेकर वरिष्ठ अधिकारियों तक सभी पर यह प्रावधान समान रूप से लागू होगा.

आवास खाली नहीं करने पर वसूला जाएगा किराया

आदेश के अनुसार, भोपाल से बाहर स्थानांतरित होने की स्थिति में शासकीय सेवक अधिकतम 6 माह तक ही शासकीय आवास धारण कर सकेगा. इस अवधि में सामान्य किराया लिया जाएगा, लेकिन निर्धारित समय सीमा के बाद आवास खाली नहीं करने पर दंडात्मक किराया वसूला जाएगा और सख्ती से बेदखली की कार्रवाई की जाएगी.

दंडात्मक किराया 90 हजार रुपये तक हो सकता है. हालांकि यह फैसला भी कैबिनेट में पिछले दिनों लिया गया था. जिसके बाद कई विधायक और मंत्रियों को नोटिस भी जारी हुआ. अफसर के खिलाफ भी संपदा ने नोटिस जारी किया है. हालांकि अधिकारियों ने तर्क दिया है कि उनके बच्चे भोपाल में पढ़ रहे हैं. इसलिए कुछ दिन का समय तय किया जाए. इस पर गृह विभाग ने अपनी एक नई गाइडलाइन जारी कर दी है.

सेवानिवृत्त कर्मचारियों को 6 माह की राहत

सेवानिवृत्ति की स्थिति में कर्मचारियों को कुल 6 माह की सशर्त अनुमति दी गई है. पहले 3 माह तक सामान्य किराया दर पर आवास रखा जा सकेगा. इसके बाद अगले 3 माह तक आवास रखने पर सामान्य किराए की 10 गुना दर से किराया देना होगा. यदि 6 माह की अवधि पूरी होने के बाद भी आवास खाली नहीं किया गया तो दंड स्वरूप किराया वसूला जाएगा और बेदखली की कार्रवाई की जाएगी.

त्यागपत्र या सेवा से पृथक होने पर केवल 3 माह

त्यागपत्र देने, सेवा से पृथक होने या अन्य कारणों से अनधिकृत होने की स्थिति में शासकीय सेवक को केवल 3 माह तक ही शासकीय आवास में रहने की अनुमति होगी, वह भी सामान्य किराया दर पर. तीन माह की अवधि समाप्त होते ही नियमानुसार दंडात्मक किराया वसूली और तत्काल बेदखली की कार्रवाई की जाएगी.

आवासों की उपलब्धता बढ़ाने की कोशिश

गृह विभाग के अनुसार इन संशोधित नियमों का उद्देश्य शासकीय आवासों का दुरुपयोग रोकना और वास्तविक जरूरतमंद अधिकारियों -कर्मचारियों को समय पर आवास उपलब्ध कराना है. मियाद गुजरने के बाद अब किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं बरती जाएगी.

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