‘हम तेरे बाप से नहीं डरे..’, Alirajpur में जमीन अधिग्रहण पर सियासी घमासान, पटेल और चौहान परिवार आमने-सामने

आलीराजपुर जिले में जमीन अधिग्रहण के मुद्दे पर कांग्रेस नेता महेश पटेल और कैबिनेट मंत्री नागर सिंह चौहान के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है. बाप तक पहुंची टिप्पणियों के बाद पटेल Vs चौहान परिवार की सियासी लड़ाई और तेज हो गई है.
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रिपोर्ट-मनीष अरोड़ा

Alirajpur News: जिले की राजनीति में इन दिनों कांग्रेस के दिग्गज नेता महेश पटेल और कैबिनेट मंत्री नागर सिंह चौहान के बीच बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है. जमीन अधिग्रहण के मुद्दे को लेकर शुरू हुई राजनीतिक लड़ाई अब दोनों नेताओं के बीच सीधी जुबानी जंग में बदल गई है.

आलीराजपुर की राजनीति में मचा सियासी घमासान

दरअसल, कुछ दिनों पहले कैबिनेट मंत्री नागर सिंह चौहान ने मंच से बयान देते हुए कहा था कि “हम तेरे बाप से नहीं डरे तो तेरे से क्या डरेंगे भाई.” अब इसी बयान का जवाब कांग्रेस नेता महेश पटेल ने जोबट में आयोजित विरोध प्रदर्शन के दौरान मंच से दिया. महेश पटेल ने पलटवार करते हुए कहा कि “हम भी नहीं डरते, 2003 के पहले तेरे बाप से पूछ लेना.” दोनों नेताओं के इन बयानों के बाद आलीराजपुर की सियासी गलियों में राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं.

पटेल और चौहान परिवार के बीच लंबे समय से विवाद

दरअसल, आलीराजपुर जिले में पटेल और चौहान परिवार लंबे समय से राजनीति के दो बड़े केंद्र रहे हैं. कांग्रेस की ओर से जहां जोबट विधानसभा में विधायक सेना महेश पटेल हैं और महेश पटेल कांग्रेस की राजनीति का प्रमुख चेहरा हैं, वहीं आलीराजपुर विधानसभा से कैबिनेट मंत्री नागर सिंह चौहान भाजपा के सबसे प्रभावशाली नेताओं में शामिल हैं.

एक समय आलीराजपुर क्षेत्र की राजनीति में पूर्व विधायक स्वर्गीय वेस्ता पटेल का मजबूत राजनीतिक दबदबा रहा। उनके निधन के बाद वर्ष 2003 में नागर सिंह चौहान विधायक बने और इसके बाद जिले की राजनीति धीरे-धीरे दो प्रमुख धड़ों-पटेल और चौहान खेमे-के इर्द-गिर्द सिमटती चली गई.

कांग्रेस के कमजोर दौर में भी महेश पटेल ने जिले में पार्टी को मजबूत बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई. वहीं नागर सिंह चौहान लगातार भाजपा का बड़ा चेहरा बने रहे. अब जोबट विधानसभा क्षेत्र में जमीन अधिग्रहण का मुद्दा दोनों राजनीतिक खेमों के बीच नई जंग का कारण बन गया है. हजारों किसानों और आदिवासी परिवारों की जमीन से जुड़े इस मुद्दे ने सामाजिक आंदोलन के साथ-साथ राजनीतिक रंग भी ले लिया है.

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