बालाघाट टू केदारनाथ, नौकरी छोड़ धार्मिक यात्रा पर निकले दो दोस्त, एक कर रहा ‘दंडवत प्रणाम’, दूसरा पैदल चलकर उठा रहा सामान

Balaghat To Kedarnath Dandvat Yatra: निर्मल और तुलेंद्र दोनों दोस्त मध्य प्रदेश के बालाघाट से उत्तराखंड में स्थित केदारनाथ धाम के लिए निकले हैं. करीब 1450 किमी लंबी इस कठिन यात्रा में दोनों एक-दूसरे का सहारा बने हुए हैं. अब तक उन्होंने 143 दिनों में 600 किमी की यात्रा कर चुके हैं.
balaghat to kedarnath 1540 km dandvat yatra two friend nirmal uikey and tulendra maravi

बालाघाट से केदारानाथ धाम के लिए निकले दो दोस्त

Balaghat To Kedarnath Dandvat Yatra: मध्य प्रदेश के बालाघाट के दो युवा इन दिनों चर्चा का विषय बने हुए हैं. सोशल मीडिया पर उनकी धार्मिक यात्रा के बारे में लोग बातें कर रहे हैं और तारीफ भी कर रहे हैं. दरअसल, निर्मल उईके (23 साल) और तुलेंद्र मरावी (22 साल) अनोखी यात्रा पर निकले हैं. इस यात्रा के साथ-साथ उनकी दोस्तों की चर्चा भी हो रही है. एक दोस्त ‘दंडवत प्रणाम’ करते हुए आगे बढ़ रहा है तो वहीं दूसरा सारा सामान उठाकर पैदल चल रहा है. दोनों की श्रद्धा और भक्ति सुर्खियों में बनी हुई है.

600 किमी का सफर तय किया

निर्मल और तुलेंद्र दोनों दोस्त मध्य प्रदेश के बालाघाट से उत्तराखंड में स्थित केदारनाथ धाम के लिए निकले हैं. करीब 1450 किमी लंबी इस कठिन यात्रा में दोनों एक-दूसरे का सहारा बने हुए हैं. अब तक उन्होंने 143 दिनों में 600 किमी की यात्रा कर चुके हैं. उनकी धार्मिक यात्रा मंगलवार (7 जुलाई 2026) को उत्तर प्रदेश के झांसी पहुंची. उनकी यात्रा को देखकर लोग सराहना कर रहे हैं. दोस्तों के अनुसार इस यात्रा का उद्देश्य मात्र भगवान शिव के दर्शन करना नहीं बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का संदेश देना भी है.

कठिन यात्रा के लिए छोड़ी नौकरी

इस कठिन यात्रा के लिए निर्मल उईके ने नौकरी छोड़ दी. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने बताया कि उन्हें साल 2024 में केदारनाथ तक ‘दंडवंत प्रणाम’ यात्रा का विचार आया तो नौकरी छोड़ दी. इसके बाद उन्होंने इसे पूरा करने के लिए करीब डेढ़ साल तक तैयारी की. महाशिवरात्रि से इस यात्रा की शुरुआत की.

ये भी पढ़ें: जबलपुर में तैयार होने वाला है MP का दूसरा सबसे बड़ा भारत माता मंदिर, 15 अगस्त के मौके पर होगा लोकार्पण

लोगों का मिल रहा भरपूर सहयोग

इस धार्मिक यात्रा के लिए दोनों दोस्त जहां से गुजर रहे हैं, वहां उन्हें लोगों का सहयोग मिल रहा है. त्याग, तपस्या और समर्पण देखकर लोग भावुक नजर आ रहे हैं. लोग उन्हें पानी, भोजन और आवश्यक सामग्री देकर उनका उत्याह बढ़ा रहे हैं. केदारनाथ तक की यात्रा समाज को जागरूक करने के साथ-साथ सेवा का संदेश देना का अनूठा अभियान बन गई है.

ज़रूर पढ़ें