निवाड़ी में केमिकल के पानी से 10 हजार मछलियों की मौत, ग्रामीण बोले- PiML कंपनी की गंदगी से नदी, तालाब हो सकते हैं जहरीले
निवाड़ी में केमिकल पानी से 10 हजार मछलियों की मौत.
Input- विवेक डांगी
MP News: निवाड़ी जिले के नेगुआ में लौह अयस्क कंपनी से निकलने वाले केमिकल पानी से नदी और तालाब दूषित हो रहे हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि PiML कंपनी के कचरायुक्त केमिकल पानी से लगभग 10 हजार मछलियों की मौत हो चुकी है. ग्रामीणों का कहना है कि अगर नदी और तालाबों तक पानी पहुंचता है तो आसपास के गांव के लिए घातक हो सकता है.
‘नौकरी दिलाने का सपना दिखाकर हमारी जमीन सस्ते में खरीद ली’
ग्रामीणों के मुताबिक कुछ महीने पहले ही इस कंपनी की शुरुआत हुई थी. इस कंपनी को जब जगह माइनिंग विभाग द्वारा दी गई तो इस कंपनी ने शासन की जमीन के साथ-साथ आसपास के लोगों की जमीन भी खरीदना शुरू दी. ग्रामीणों को सपने दिखाए कि आप अपनी जमीन हमें दीजिए. हम अच्छे दाम भी देंगे और आपको नौकरी भी देंगे. अब वहां के लोगों का कहना है कि ना तो जमीनों के सही दाम दिए गए और ना ही हमको नौकरियां दी गईं. इस कंपनी ने वहां की लोगों के साथ वादा खिलाफी की और ना ही उन्हें कोई रोजगार दिया.
कंपनी से 100 मीटर की दूरी पर वन विभाग की जमीन
ग्रामीणों का कहना है कि सबसे बड़ी समस्या ये है कि मात्र 100 मीटर की दूरी पर वन विभाग की भूमि लगी हुई है. वन परिक्षेत्र ओरछा के साथ ही अभ्यारण भी जुड़ा हुआ है. कंपनी से निकलने वाले हानिकारक रासायनिक पानी से अभी तालाब में मछलियों की ही मौत हुई. अगर ये पानी छोटी नदी में पहुंचकर जमीन और बितवल नदी में भी पहुंचता है तो इसमें लोगों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ेगा. क्योंकि इन नदियों से निवाड़ी और पृथ्वी पर जैसे नगरों के साथ आसपास के गांव में पेयजल व्यवस्था भी जुड़ी हुई है. अगर गंदा पानी वहां पहुंचता है तो बड़ी संख्या में लोग बीमारी हो सकते हैं. सरकार को इसका ध्यान रखना होगा.
जिम्मेदार आश्वासन देकर वापस चले गए
फिलहाल इसकी शिकायत ग्रामीणों ने की और एसडीएम को शिकायती पत्र भेजा है. वहीं मौके पर अधिकारी भी पहुंचे और उन्होंने एक छोटी सी हिदायत कंपनी के कर्मचारियों को देकर वापस लौट आए. जबकि यह भविष्य की बड़ी चिंता है, जिस पर सभी अधिकारियों ने चुप्पी साध रखी है. विस्तार न्यूज़ की टीम ग्राउंड जीरो पर पहुंची और इस पूरे प्लांट की हकीकत जानकर जनता की समस्या को सामने लाई है. जब इस कंपनी के अधिकारी से कॉल पर बात हुई तो वह बात करने से बचते नजर आए. अधिकारी ने कहा कि हम छोटे-छोटे टांका में ही उसे गंदे पानी को समाहित कर लेंगे. अभी मात्र 2% ही काम शुरू हुआ है और पानी तालाब और नदियों में बहने लगा है. 20% काम करने के बाद तो इतनी भारी मात्रा में पानी आखिर कहां जाएगा? तालाबों, नदियों को प्रदूषित ही करेगा. यह बड़ा सवाल है कि आखिर प्रशानिक अधिकारियों ने पूरे मामले पर चुप्पी क्यों साध रखी है.
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