कटनी जिला अस्पताल के बाहर दलालों का खेल! 108 एंबुलेंस से सीधे निजी अस्पतालों में भेजे जा रहे मरीज

MP News: इस पूरे खेल में कमीशन का बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है. जिसमें आधी रकम दलालों और एंबुलेंस कर्मियों तक पहुंचती है, जबकि बाकी निजी अस्पताल संचालकों को पहुंचायी जा रही है. कई गरीब परिवार अपने मरीज की जान बचाने के लिए कर्ज लेने, गहने बेचने या मकान तक गिरवी रखने को मजबूर हो जाते हैं
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कटनी: 108 एंबुलेंस से मरीजों को निजी अस्पताल ले जाया जा रहा

MP News: (कटनी से यश खरे की रिपोर्ट) कटनी के जिला अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीजों और उनके परिजनों के साथ कथित रूप से बड़ा खेल किए जाने का मामला सामने आया है. एक वीडियो ने पूरे सिस्टम को हिला दिया है और दलालों की सक्रियता को साबित कर दिया है. 108 एंबुलेंस कर्मियों, निजी एंबुलेंस संचालकों और निजी अस्पतालों के दलालों की मिलीभगत उजागर हुई है. सरकारी अस्पताल में इलाज कराने पहुंच रहे मरीजों के प्राइवेट हॉस्पिटल ले जाया जा रहा है.

क्या है पूरा मामला?

मरीज को जैसे ही शासकीय 108 एंबुलेंस से कटनी के जिला अस्पताल लाया जाता है. वैसे ही दलालों की सक्रिय भूमिका देखने को मिलती है और 108 एंबुलेंस से मरीज जिला अस्पताल पहुंचते तो हैं, पर अस्पताल परिसर के आसपास सक्रिय दलाल मरीज और उनके परिजनों को गंभीर स्थिति का डर दिखाकर घबराने लगते हैं. इसके बाद मरीज को बेहतर इलाज का झांसा देकर निजी अस्पतालों में भर्ती करा दिया जाता है.

कमीशन का बड़ा खेल

इस पूरे खेल में कमीशन का बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है. जिसमें आधी रकम दलालों और एंबुलेंस कर्मियों तक पहुंचती है, जबकि बाकी निजी अस्पताल संचालकों को पहुंचायी जा रही है. कई गरीब परिवार अपने मरीज की जान बचाने के लिए कर्ज लेने, गहने बेचने या मकान तक गिरवी रखने को मजबूर हो जाते हैं. बावजूद इसके जिला अस्पताल प्रबंधन और जिला प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है.

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एंबुलेंस का नंबर भी दर्ज किया गया

मामले में शासकीय 108 एंबुलेंस क्रमांक CG–S 2413 का नंबर सामने आया है. साथ ही एक निजी एंबुलेंस वाहन की भी भूमिका बताई जा रही है. वीडियो में दोनों वाहनों की मौजूदगी मरीज को उतरते ओर दूसरे एंबुलेंस में ले जाते दिखाई दे रहे हैं. हालांकि प्राइवेट एम्बुलेंस वाहन नंबर स्पष्ट रूप से नजर नहीं आ रहे हैं.

अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर जिला अस्पताल परिसर के आसपास सक्रिय इन कथित दलालों पर कार्रवाई कब होगी? और क्या मरीजों की मजबूरी को कारोबार बनाने वाले इस नेटवर्क पर प्रशासन शिकंजा कस पाएगा?

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