डिंडोरी में सिस्टम की लापरवाही से किसान परेशान, 9 साल बाद ना बांध बना, ना मिला मुआवजा, जमीन का कर लिया अधिग्रहण
डिंडोरी: किसान मुआवजे के लिए परेशान
MP News: (डिंडोरी से अनिल साहू की रिपोर्ट) मध्य प्रदेश के आदिवासी बाहुल्य डिंडौरी जिले में सरकारी सिस्टम की लापरवाही का खामियाजा सैकड़ों किसानो को भुगतना पड़ रहा है. दरअसल जिले के बिठलदेह गांव में डिंडोरी मध्यम सिंचाई परियोजना के लिए प्रशासन ने किसानों की जमीन अधिग्रहित कर लिया और राजस्व रिकॉर्ड से नाम भी हटा दिया गया लेकिन आज तक किसानों को मुआवजा नहीं मिला.
हालत अब यह है कि किसान न अपनी जमीन के मालिक रहे और न सरकारी योजनाओं का लाभ ले पा रहे हैं. सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जल संसाधन विभाग के अनुसार मुआवजे के लिए 90 करोड़ रुपये नौ साल पहले ही जमा करा दिए गए थे.
क्या है पूरा मामला?
पूरा मामला करंजिया जनपद क्षेत्र अंतर्गत बिठलदेह गांव में सिवनी नदी पर वर्ष 2016-17 में लगभग 384 करोड़ रुपये की लागत से डिंडौरी मध्यम सिंचाई परियोजना प्रस्तावित की गई थी. परियोजना से 11 गांव प्रभावित था और करीब 988 किसानों के विस्थापन की योजना बनाई गई थी, लेकिन ग्रामीणों के विरोध के कारण आज तक बांध निर्माण शुरू नहीं हो सका.

वर्ष 2022 में जिला प्रशासन ने परियोजना के लिए 527 किसानों की सैकड़ों एकड़ भूमि का अधिग्रहण कर लिया. इनमें से 159 किसानों ने सहमति दी थी जिन्हें मुआवजा दे दिया गया लेकिन जिन किसानों ने विरोध किया. उनकी जमीन अनिवार्य अधिग्रहण के तहत लिया गया, जबकि बाद में 368 किसानों ने सहमति दी तो उन्हें पहली किस्त मिली उसके बाद किसानों का चार साल बाद भी मुआवजा कि राशि अटकी हुई है.
जल संसाधन विभाग की हुई जमीन
बांध निर्माण के नाम पर किसानों कि अधिक भूमि को राजस्व रिकॉर्ड से हटाकर जल संसाधन विभाग के नाम दर्ज कर दिया गया है. किसानों को मुआवजा कि राशि आज भी लंबित है. किसानों नें बताया कि अब वो सरकारी योजनाओं से भी वंचित हो गए हैं. किसान समर्थन मूल्य पर फसल नहीं बेच पा रहे हैं. सोसायटी से खाद-बीज नहीं मिल रहा है और जमीन पर उनका अधिकार भी खत्म हो चुका है.
मामले में जल संसाधन विभाग का कहना है कि भू-अर्जन के लिए वर्ष 2017 में ही 90 करोड़ रुपये प्रशासन के खाते में जमा कराए जा चुके हैं. इसके बावजूद किसानों को भुगतान क्यों नहीं हुआ. इसका जवाब भू-अर्जन शाखा ही दे सकती है. वही दूसरी तरफ कलेक्टर अंजू भदौरिया ने मामले को गभीरता से लेते हुए उचित कार्रवाई का भरोसा जताया है.
सिस्टम कि लापरवाही से परेशान किसान
सबसे बड़ा सवाल यह है की जब मुआवजे की राशि 90 करोड़ रुपये वर्ष 2017 में जमा कराई जा चुकी थी तो किसानों को अबतक मुआवजे की राशि क्यों नहीं दी गई. सूत्रों से जानकारी यह निकलकर आ रही है कि जल संसाधन और भूअर्जन करने वाले अधिकारियों के बीच तालमेल सही नहीं होने के कारण किसान दर-दर की ठोकरें खाने के लिए मजबूर हैं.
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न बांध बना न मुआवजा मिला
नौ साल पहले जिस परियोजना को सिंचाई और विकास का सपना बताकर शुरू किया गया था. वह अब सैकड़ों किसानों के लिए संकट बन चुकी है. बांध अब तक नहीं बना, जमीन जा चुकी है, मुआवजा अधूरा है और सरकारी योजनाओं से भी किसान बाहर हो गए हैं. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर किसानों के अधिकारों की जिम्मेदारी कौन लेगा?