MP News: मध्य प्रदेश की आबकारी नीति पर मंथन, तीन साल के लिए शराब ठेके और रिजर्व प्राइज में कमी चाहते हैं ठेकेदार

MP News: ठेकेदारों की मांग है कि आबकारी ठेकों की रिजर्व प्राइज घटाई जाए और ठेके के आधार पर न्यूनतम लिफ्टिंग की सीमा कम की जाए.
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सांकेतिक तस्‍वीर

MP News: मध्य प्रदेश में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नई आबकारी नीति बनाने की कवायद शुरू हो गई है. इसको लेकर शराब ठेकेदारों, बार संचालकों और आबकारी विभाग के अफसरों के साथ अलग-अलग बैठकों का दौर चला, जिसमें कई अहम और रोचक सुझाव सामने आए. ठेकेदारों की मांग है कि आबकारी ठेकों की रिजर्व प्राइज घटाई जाए और ठेके के आधार पर न्यूनतम लिफ्टिंग की सीमा कम की जाए, जबकि आबकारी विभाग के अफसर चाहते हैं कि शराब की एमएसपी और एमआरपी तय करने का अधिकार जिला स्तर को दिया जाए.

उपमुख्‍यमंत्री ने बुलाई विभाग के अधिकारियों की बैठक

उपमुख्यमंत्री और वाणिज्य कर मंत्री जगदीश देवड़ा ने विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक बुलाकर स्पष्ट किया कि ऐसी नीति बनाई जाए जिससे इन्फोर्समेंट भी मजबूत हो और विभाग की आय भी बढ़े. उनके निर्देश पर आबकारी आयुक्त अभिजीत अग्रवाल ने प्रदेश के प्रमुख आबकारी ठेकेदारों, बार संचालकों और आबकारी विभाग के अधिकारियों की अलग-अलग बैठकें आयोजित की है. इन बैठकों में ठेकेदारों ने अपनी आमदनी बढ़ाने और कारोबार को आसान बनाने के लिए कई सुझाव रखे. ठेकेदारों का कहना था कि रिजर्व प्राइज में हर साल की जाने वाली 20 प्रतिशत की वृद्धि बहुत ज्यादा है, इसे घटाकर 10 प्रतिशत किया जाना चाहिए ताकि अधिक से अधिक लोग ठेकों की नीलामी में हिस्सा ले सकें. इसके साथ ही आबकारी ठेकों में ड्यूटी के तहत तय की गई 85 प्रतिशत लिफ्टिंग को कम करने का सुझाव भी दिया गया.

टैक्सेशन का नाम करने पर मिलेगा जीएसटी से फायदा

ठेकेदारों ने यह भी कहा कि शराब पर लगने वाला वैट कम किया जाए क्योंकि संचालन लागत लगातार बढ़ रही है और मुनाफा घटता जा रहा है. उनका तर्क था कि मार्जिन बढ़ाया जाए ताकि ठेकेदारों का लाभ भी बढ़ सके. ग्रुपों के स्वरूप में कोई बदलाव न किया जाए और बार की एमजीक्यू को कम किया जाए. टैक्सेशन का नाम बदलने का सुझाव भी दिया गया ताकि जीएसटी के तहत इसका लाभ मिल सके. लाइसेंस फीस में बदलाव करने और पॉलिसी को लांग टर्म यानी दो से तीन साल के लिए लागू करने की मांग भी रखी गई. ठेकेदारों का कहना था कि लंबे समय की नीति से निवेश और संचालन दोनों में स्थिरता आएगी. बार संचालकों ने शिकायत की कि अभी दो बार वैट लगता है, एक बार लिफ्टिंग के समय और दूसरी बार ग्राहकों को परोसते समय, इसे घटाकर एक बार किया जाना चाहिए. इन बैठकों में लगभग सौ ठेकेदार शामिल हुए थे.

अफसर की इच्छा एमआरपी तय करने का मिले पावर

दूसरी ओर आबकारी विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की बैठक में यह सुझाव सामने आया कि शराब की एमएसपी और एमआरपी तय करने का अधिकार जिला स्तर पर दिया जाना चाहिए ताकि स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार कीमतें नियंत्रित की जा सकें. इसके साथ ही विभागीय अमले की संख्या बढ़ाने, आधुनिक लैब स्थापित करने और डिजिटल अल्कोहल मीटर उपलब्ध कराने की भी मांग उठी. अधिकारियों ने यह भी कहा कि बड़ी कंपनियों की महंगी शराब में नकली ब्रांड भरने की शिकायतें मिलती रहती हैं, इसलिए ट्रैक एंड ट्रेस सिस्टम लागू किया जाना चाहिए ताकि पूरी सप्लाई चेन पर नजर रखी जा सके.

उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने इन सभी सुझावों पर गंभीरता से विचार करने के संकेत दिए हैं. उन्होंने अधिकारियों से कहा है कि प्रवर्तन यानी इन्फोर्समेंट को और तेज किया जाए, अमले की संख्या बढ़ाई जाए और ऐसी नीति बनाई जाए जिससे विभाग की आय में भी बढ़ोतरी हो. नई आबकारी नीति को लेकर मंथन का यह दौर आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है, क्योंकि सरकार एक ऐसी पॉलिसी चाहती है जो राजस्व बढ़ाने के साथ-साथ अवैध गतिविधियों पर भी प्रभावी नियंत्रण कर सके.

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