MP News: ऑपरेशन FACE में फर्जी सिम कार्ड नेटवर्क का बड़ा खुलासा, 880 चेहरे पर जारी हुए 1.21 लाख सिम
सिम कार्ड
MP News: देशभर में चलाए जा रहे ऑपरेशन फेशियल ऑथेंटिकेशन एंड कंप्लायंस एन्फोर्समेंट (FACE) के तहत फर्जी सिम कार्ड के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है. डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकॉम (डीओटी) द्वारा पुलिस को साझा किए गए डेटा में सामने आया है कि करीब 880 संदिग्ध लोगों के चेहरों का इस्तेमाल कर 1.21 लाख से ज्यादा सिम कार्ड जारी किए गए. यह मामला साइबर अपराध और पहचान की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा करता है.
मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ सबसे ज्यादा प्रभावित
इस पूरे मामले में मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य सामने आए हैं. मध्यप्रदेश में करीब 700 संदिग्ध व्यक्तियों के चेहरों पर लगभग एक लाख सिम कार्ड एक्टिव मिले हैं. वहीं छत्तीसगढ़ में 180 संदिग्धों के नाम पर करीब 21 हजार सिम कार्ड जारी किए गए हैं. हैरानी की बात यह है कि करीब 100 ऐसे चेहरे भी मिले हैं, जिनका इस्तेमाल दोनों राज्यों में सिम कार्ड लेने के लिए किया गया.
भोपाल में कार्रवाई के दौरान दो एजेंट गिरफ्तार
राजधानी भोपाल में भी इस नेटवर्क के तार जुड़े मिले हैं. साइबर पुलिस ने हाल ही में कार्रवाई करते हुए दो सिम विक्रेता एजेंटों को गिरफ्तार किया है. जांच में सामने आया कि आरोपियों ने एक ही व्यक्ति के चेहरे का इस्तेमाल कर 246 फर्जी सिम कार्ड एक्टिव कर दिए थे. यह कार्रवाई भी ऑपरेशन FACE के तहत ही की गई.
ऐसे काम करता है पूरा नेटवर्क
जांच में पता चला है कि सिम विक्रेता ग्राहकों के दस्तावेजों की फोटोकॉपी अपने पास रख लेते थे. बाद में इन्हीं दस्तावेजों का इस्तेमाल अलग-अलग नाम और पते के साथ बड़ी संख्या में सिम कार्ड जारी कराने के लिए किया जाता था. इस तरह एक ही व्यक्ति की पहचान का दुरुपयोग कर सैकड़ों सिम सक्रिय कर दिए जाते थे.
एआई तकनीक से हुआ खुलासा
डीओटी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित फेशियल रिकग्निशन तकनीक की मदद से इस नेटवर्क का पर्दाफाश किया. पहले चरण में ऐसे मामलों की पहचान की गई, जहां एक ही नाम पर 50 से अधिक सिम कार्ड सक्रिय थे. इसके बाद यह डेटा राज्य साइबर पुलिस को सौंपा गया, जिसके आधार पर विभिन्न जिलों में जांच शुरू हुई.
साइबर अपराध से जुड़ाव की जांच
पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि इन फर्जी सिम कार्ड का इस्तेमाल किन-किन साइबर अपराधों में किया गया. शुरुआती जांच में आशंका जताई जा रही है कि इन सिम का उपयोग ऑनलाइन ठगी, फर्जी कॉल और अन्य साइबर अपराधों में किया जा रहा था.
फर्जी सिम रोकने के लिए जरूरी कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए सख्त कदम जरूरी हैं. लाइव फेस ऑथेंटिकेशन अनिवार्य किया जाए, एक व्यक्ति के नाम पर सिम की संख्या का रियल टाइम ट्रैक रखा जाए और सिम विक्रेताओं की नियमित ऑडिटिंग हो. साथ ही सभी टेलीकॉम कंपनियों के बीच साझा डेटाबेस भी तैयार किया जाना चाहिए.
अपने नाम पर सिम ऐसे करें चेक
लोग अपने नाम पर जारी सिम कार्ड की जानकारी डीओटी के TAF-COP पोर्टल पर जाकर प्राप्त कर सकते हैं. मोबाइल नंबर डालकर ओटीपी के जरिए लॉगिन करने पर उनके नाम पर एक्टिव सभी नंबरों की सूची सामने आ जाती है. अगर कोई नंबर संदिग्ध लगे तो उसे तुरंत ब्लॉक या रिपोर्ट किया जा सकता है.