MP में NHM के 15 हजार से ज्यादा पद खाली, 43 हजार नई भर्ती के लिए केंद्र को प्रस्ताव भेजा

सरकार ने यह भी जानकारी दी कि वर्ष 2026-27 के लिए 43 हजार पदों की स्वीकृति हेतु प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है. स्वीकृति मिलने के बाद यह तय किया जाएगा कि किन-किन श्रेणियों के पदों पर भर्ती की जाएगी.
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सांकेतिक तस्वीर.

MP News: राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत मध्य प्रदेश में वर्ष 2026 में 15 हजार से अधिक पद रिक्त होने का मामला सदन में उठा. सरकार ने स्वीकार किया कि नियमित भर्ती में देरी और प्रक्रियागत कारणों से बड़ी संख्या में पद खाली हैं. स्थिति को संभालने के लिए “गैप फिलिंग” व्यवस्था अपनाई जा रही है और संविदा पदों पर भी भर्ती की प्रक्रिया जारी है.

43 हजार पदों पर भर्ती के लिए केंद्र को प्रस्ताव भेजा

सरकार ने यह भी जानकारी दी कि वर्ष 2026-27 के लिए 43 हजार पदों की स्वीकृति हेतु प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है. स्वीकृति मिलने के बाद यह तय किया जाएगा कि किन-किन श्रेणियों के पदों पर भर्ती की जाएगी. इसके अलावा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत संविदा नियुक्ति के 146 पद भी वर्तमान में रिक्त बताए गए हैं. हालांकि सरकार ने मरीजों के विस्तृत डेटा को साझा करने से इंकार करते हुए कहा कि संबंधित जानकारी विभागीय प्रक्रिया के तहत उपलब्ध कराई जाती है.

सेंधवा में सोनोग्राफी मशीन, लेकिन रेडियोलॉजिस्ट नहीं

कांग्रेस विधायक मोंटू सोलंकी ने सेंधवा जिले की स्वास्थ्य सुविधाओं का मुद्दा उठाया। उन्होंने सवाल किया कि लंबे समय से पड़ी सोनोग्राफी मशीन का नियमित उपयोग क्यों नहीं हो पा रहा है। जवाब में सरकार ने बताया कि रेडियोलॉजिस्ट का पद खाली है। फिलहाल दो प्रशिक्षित डॉक्टरों के माध्यम से सप्ताह में दो-दो दिन गर्भवती महिलाओं को सोनोग्राफी सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि जिले में रेडियोलॉजिस्ट विशेषज्ञ का पद स्वीकृत ही नहीं है। जिले में चिकित्सकों के 23 स्वीकृत पदों में से 16 पद खाली हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं पर सीधा असर पड़ रहा है।

इंदौर में डॉक्टरों की संख्या पर सवाल

इंदौर जिले में भी डॉक्टरों की कमी को लेकर प्रश्न पूछा गया. सरकार ने जवाब में बताया कि जिले में 9 शासकीय अस्पताल, 41 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, 8 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और 124 उप स्वास्थ्य केंद्र संचालित हैं. इन संस्थानों में कुल 78 डॉक्टर कार्यरत हैं. सरकार ने कहा कि क्षेत्रीय संचालक और सीएमएचओ स्तर पर कर्मचारियों का स्थानांतरण किया जा सकता है, ताकि आवश्यकता वाले क्षेत्रों में तैनाती की जा सके. हालांकि विपक्ष का तर्क है कि इतनी बड़ी आबादी वाले जिले के लिए यह संख्या अपर्याप्त है.

जांच के घेरे में आयुष्मान योजना से जुड़े 26 अस्पताल

सदन में यह भी खुलासा हुआ कि आयुष्मान भारत योजना से जुड़े 26 अस्पतालों के खिलाफ धोखाधड़ी की शिकायतें प्राप्त हुई हैं. सरकार ने बताया कि इन मामलों की जांच जारी है. कई अस्पतालों को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया गया है और अनियमित भुगतान की रिकवरी के आदेश भी जारी किए गए हैं.

सरकार का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सख्त कार्रवाई की जा रही है. वहीं विपक्ष का आरोप है कि खाली पदों, विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी और उपकरणों के अनुपयोगी पड़े रहने से आम जनता को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है.

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