‘पार्टी की हर संपत्ति का दस्तावेजी ब्योरा उपलब्ध कराया जाए’, MP कांग्रेस ने सभी जिलाअध्यक्षों से खाली जमीनों का ब्योरा मांगा
मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी.
MP News: मध्य प्रदेश की राजनीति में नए सिरे से सक्रियता दिखाने की कोशिश कर रही मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने अब अपनी आर्थिक सेहत सुधारने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. पार्टी ने सभी जिला अध्यक्षों को पत्र लिखकर कांग्रेस के नाम दर्ज जमीन, भवन और अन्य अचल संपत्तियों की विस्तृत जानकारी मुख्यालय को भेजने के निर्देश दिए हैं. माना जा रहा है कि संगठन अपनी निष्क्रिय या कम उपयोग में आ रही संपत्तियों को किराए पर देकर स्थायी फंड जुटाने की रणनीति पर काम कर रहा है.
पार्टी सूत्रों के अनुसार, लंबे समय से कई जिलों में कांग्रेस की जमीन और भवनों का रिकॉर्ड व्यवस्थित रूप से अपडेट नहीं हुआ था. कई जगह पुराने कार्यालय जर्जर हालत में हैं, तो कुछ संपत्तियां वर्षों से बंद पड़ी हैं. ऐसे में मुख्यालय ने सभी इकाइयों को स्पष्ट संदेश दिया है कि पार्टी की हर संपत्ति का दस्तावेजी ब्योरा उपलब्ध कराया जाए, चाहें वह उपयोग में हो, खाली हो या विवादित स्थिति में हो.
एक हजार करोड़ से ज्यादा संपत्ति का अनुमान
आंतरिक आकलन के मुताबिक, मध्य प्रदेश में कांग्रेस के नाम पर दर्ज संपत्तियों का कुल मूल्य करीब एक हजार करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है. हालांकि यह अनुमानित आंकड़ा है और वास्तविक स्थिति जिला इकाइयों से मिलने वाली रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगी. संगठन का मानना है कि यदि इन संपत्तियों का पेशेवर प्रबंधन किया जाए तो पार्टी को नियमित आय का बड़ा स्रोत मिल सकता है, जिससे चुनावी और संगठनात्मक गतिविधियों को गति दी जा सके.
कब्जों और विवादों की शिकायत
कई जिला अध्यक्षों ने यह भी संकेत दिया है कि कुछ स्थानों पर कांग्रेस की पुरानी जमीनों और भवनों पर अवैध कब्जे हैं. आरोप हैं कि स्थानीय स्तर पर प्रभावशाली लोगों या राजनीतिक विरोधियों ने संपत्तियों पर नियंत्रण जमा रखा है. मुख्यालय ने ऐसे मामलों में पूरी जानकारी मांगी है, ताकि कानूनी कार्रवाई कर संपत्तियों को मुक्त कराया जा सके. पार्टी नेतृत्व का कहना है कि संपत्ति का संरक्षण संगठन की सामूहिक जिम्मेदारी है.
भोपाल मॉडल से प्रेरणा- हर महीने 25 से 30 लाख की आय
राजधानी भोपाल के रोशनपुरा चौराहे पर कांग्रेस के नाम दर्ज भवन को एक सफल उदाहरण माना जा रहा है. यहां स्थित दुकानों को किराए पर देकर हर महीने करीब 20 से 25 लाख रुपये की आय पार्टी को होती है. इसी राशि से प्रदेश कार्यालय का संचालन, नेताओं के दौरे और विभिन्न कार्यक्रमों का खर्च वहन किया जाता है. सूत्रों का कहना है कि इसी मॉडल को अन्य जिलों में भी लागू करने पर विचार हो रहा है.
आत्मनिर्भरता की ओर कदम
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बदलते राजनीतिक परिदृश्य में दलों के लिए वित्तीय आत्मनिर्भरता बेहद महत्वपूर्ण है. कांग्रेस का यह कदम ना केवल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन की कोशिश है, बल्कि संगठन को आर्थिक रूप से मजबूत करने की रणनीति भी है. यदि जिला इकाइयां समय पर सटीक जानकारी देती हैं और विवादित संपत्तियों को मुक्त कराया जाता है, तो पार्टी के लिए यह अभियान दीर्घकालिक लाभ का आधार बन सकता है. अब देखना यह है कि संपत्तियों का पूरा लेखा-जोखा सामने आने के बाद कांग्रेस किस तरह का वित्तीय मॉडल अपनाती है और क्या यह पहल संगठन को नई ऊर्जा देने में सफल हो पाती है.
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