MP में मंत्रालय की पुरानी बिल्डिंग के 5वें फ्लोर के रेनोवेशन में लगे 16 महीने, 5 फ्लोर बाकी और 100 करोड़ होंगे खर्च
वल्लभ भवन (फाइल फोटो)
MP News: मंत्रालय की पुरानी बिल्डिंग के पांचवें फ्लोर के रेनोवेशन का काम 16 महीने में पूरा हो पाया है. इसके एक हिस्से में जहां पुराना फर्नीचर और दस्तावेज रखे गए हैं. वहीं एक हिस्से में अधिकारियों को कक्ष आवंटित किए गए हैं. अब पुरानी बिल्डिंग के बचे हुए 5 फ्लोर (ग्राउंड से लेकर चौथे फ्लोर तक) के रेनोवेशन का काम बाकी है. इस बीच चौथे फ्लोर के रेनोवेशन का काम शुरू हो गया है.
रेनोवेशन पर करीब 100 करोड़ रुपए खर्च हुए
अधिकारियों का कहना है कि मंत्रालय की पूरी पुरानी बिल्डिंग के रेनोवेशन में अभी साल भर का समय लग जाएगा. इसके रेनोवेशन पर करीब 100 करोड़ रुपए खर्च होंगे. मंत्रालय की पुरानी बिल्डिंग में वर्तमान में 19 विभाग संचालित हैं. दरअसल, 9 मार्च, 2024 की सुबह वल्लभ भवन के पांचवें फ्लोर पर आग लग गई थी, जो तेजी से चौथे से तीसरे फ्लोर तक पहुंच गई थी. आग लगने से पुरानी बिल्डिंग के पांचवें फ्लोर का बड़ा हिस्सा पूरी तरह नष्ट हो गया था. साथ ही यहां कक्षों में रखा पूरा सरकारी रिकॉर्ड जलकर खाक हो गया था. आगजनी की घटना पर सवाल भी उठे थे.
इस फ्लोर पर सीएम सचिवालय के कार्यालय और मंत्रियों के कक्ष स्थित थे. इसे देखते हुए सरकार ने पांचवें फ्लोर का नए सिरे से निर्माण समेत अन्य फ्लोर को रेनोवेट करने का निर्णय लिया था. सितंबर, 2024 में कैबिनेट बैठक में मंत्रालय की पुरानी बिल्डिंग के रेनोवेशन के संबंध में प्रस्ताव को मंजूरी दी गई थी. इसके बाद मंत्रालय के पांचवें फ्लोर के कुछ हिस्से का नए सिरे से निर्माण किया गया और बचे हुए हिस्से का रेनोवेशन शुरू किया गया था, जो अब जाकर पूरा हुआ है.रेनोवेशन के कार्य में पूरी बिल्डिंग की मरम्मत के साथ नई फर्नीचर की खरीदी, दस्तावेजों का डिजिटलाइजेशन और आधुनिक फायर सेफ्टी सिस्टम की स्थापना की जाएगी.
रेनोवेशन पर इतना खर्च क्यों ?
राजधानी स्थित प्रशासनिक कार्यालय सतपुड़ा भवन में ढाई साल पहले आग लगने के बाद सतपुड़ा और विंध्याचल भवन के रेनोवेशन का प्रस्ताव तैयार किया गया था. बाद में सरकार ने दिल्ली के सेंट्रल विस्टा की तर्ज पर नया प्रशासनिक भवन बनाने का निर्णय लिया. इस कारण सतपुड़ा और विध्याचल भवन के रेनोवेशन का प्रस्ताव ठंडे बस्ते में चला गया था. नए प्रशासनिक भवन में सतपुड़ा और विंध्याचल भवन में संचालित कार्यालयों के अलावा अन्य सरकारी दफ्तर शिफ्ट किए जाएंगे. तय किया गया कि वर्तमान में उपयोग हो रहे सतपुड़ा और विंध्याचल भवनों को नए भवन बनने के बाद ही गिराया जाएगा, ताकि सरकारी कामकाज में कोई व्यवधान न आए.
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नए भवन का निर्माण मप्र हाउसिंग बोर्ड के माध्यम से किया जाएगा। खास बात यह है कि नया प्रशासनिक भवन बनाने के निर्णय के बाद भी विंध्याचल भवन स्थित विभिन्न विभागों के कार्यालयों में समय-समय पर रेनोवेशन पर लाखों रुपए खर्च किए जा रहे हैं. बड़ा सवाल यह है कि जब विंध्याचल भवन से कार्यालयों को शिफ्ट किया जाना है, तो रेनोवेशन पर पैसों की बर्बादी क्यों की जा रही है.