MP में फिर शुरू होगी पातालपानी-कालाकुंड हेरिटेज ट्रेन, 9 KM के सफर में दिखेंगे पहाड़-झरने और घाटियां, जानें टिकट-टाइमिंग

Patalpani Kalakund Heritage Train: बता दें कि कुछ समय पहले रेलवे ने मेंटेनेंस के कारण इसे बंद कर दिया था, लेकिन अब यह ट्रेन फिर से चलने के लिए पूरी तरह से तैयार है.अब देश-विदेश से आने वाले पर्यटक इस ट्रेन में बैठकर हरे-भरे पेड़-पौधों तथा खूबसूरत पहाड़ियों का नजारा देख सकेंगे और कालाकुंड स्थल का लुत्फ उठा सकेंगे.
Patalpani Kalakund Heritage Train

पातालपानी कालाकुंड ट्रेन

Patalpani Kalakund Heritage Train: मध्य प्रदेश के पातालपानी और कालाकुंड स्थल भ्रमण के लिए देश-विदेश से आ रहे पर्यटकों के लिए बहुत बड़ी खुशखबरी सामने आई है. रेलवे ने पातालपानी-कालाकुंड हेरिटेज ट्रेन का संचालन फिर से शुरू कर दिया है और अब यह ट्रेन पटरियों पर दौड़ने के लिए तैयार है. बता दें कि कुछ समय पहले रेलवे ने मेंटेनेंस के कारण इसे बंद कर दिया था, लेकिन अब यह ट्रेन फिर से चलने के लिए पूरी तरह से तैयार है.अब देश-विदेश से आने वाले पर्यटक इस ट्रेन में बैठकर हरे-भरे पेड़-पौधों तथा खूबसूरत पहाड़ियों का नजारा देख सकेंगे और कालाकुंड स्थल का लुत्फ उठा सकेंगे. रेलवे के अनुसार, पातालपानी-कालाकुंड हेरिटेज ट्रेन का संचालन अगले महीने 1 से 5 अगस्त के बीच शुरू हो सकता है.

फ्यूचर में आधुनिक विस्टाडोम कोच लगाए जा सकते हैं

रेलवे के अनुसार, पातालपानी-कालाकुंड हेरिटेज ट्रेन में भविष्य में आधुनिक विस्टाडोम कोच लगाए जा सकते हैं, जिससे पुराने पारंपरिक डिब्बों का सफर आखिरी हो सकता है. यह ट्रेन 4 सुरंगों और 29 तीखे मोड़ों से होकर गुजरती है, जो यात्रियों को हरियाली के बीच प्रकृति का अद्भुत अनुभव कराती है.

किराया और शेड्यूल

ट्रेन में 1 AC और 3 नॉन-एसी कोच हैं, जिनमें आरामदायक कुर्सियां लगी हैं. पातालपानी से सुबह 11:05 बजे चलने वाली ट्रेन 01:05 बजे कालाकुंड पहुंचती है और वापसी में 03:34 बजे चलकर 04:30 बजे वापस आती है. एक तरफ का किराया एसी के लिए 265 रुपये और नॉन-एसी के लिए 20 रुपये है . अब आपके लिए भी पातालपानी जाना आसान हो गया है.

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पातालपानी एक खूबसूरत प्राकृतिक पर्यटन स्थल

पातालपानी मध्य प्रदेश के इंदौर जिले की महू तहसील में स्थित एक बहुत ही खूबसूरत और प्रसिद्ध प्राकृतिक पर्यटन स्थल है, जो मुख्य रूप से अपने 300 फीट ऊंचे जलप्रपात और चारों ओर फैली पहाड़ियों की हरियाली के लिए जाना जाता है. चोरल नदी पर बने इस झरने के बारे में मान्यता है कि इसका निचला कुंड इतना गहरा है कि उसका पानी सीधे ‘पाताल’ तक जाता है, जिसके कारण इसका नाम पातालपानी पड़ा.

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